श्रीमहंत गोपाल गिरि बोले- अखाड़ा परिषद करे फैसला, नकली शंकराचार्य और उनके गुरुओं पर भी हो कार्रवाई
हरिद्वार। महामण्डलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ऊर्फ मिर्ची बाबा के शंकराचार्य की पांचवी पीठ की स्थापना की घोषणा के बाद से मामले को लेकर विवाद बढ़ गया है। शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच श्री शुभू पंचदशनाम अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी व्यक्ति को शंकराचार्य का पद देते हैं, ऐसे लोगों के साथ-साथ कथित तौर पर फर्जी शंकराचार्य और आचार्य बनाने वालों के सामाजिक बहिष्कार पर भी विचार होना चाहिए।
श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने कहा कि दशनाम संन्यासी परंपरा से बाहर जाकर यदि कोई व्यक्ति गिरी, पुरी, भारती, अरण्य, वन, तीर्थ, आश्रम, पर्वत या सागर जैसी उपाधियों का इस्तेमाल कर स्वयं को धार्मिक पदाधिकारी के रूप में प्रस्तुत करता है तो उसकी मान्यता और परंपरागत अधिकारों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अखाड़ा परिषद को गंभीरता से विचार कर निर्णय लेना चाहिए।
अखाड़ा परिषद करे स्पष्ट फैसला
उन्होंने कहा कि कथित नकली शंकराचार्य और आचार्य बनाने वालों के साथ-साथ उनके गुरु या संरक्षकों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यदि धार्मिक परंपरा के विरुद्ध पद और उपाधियां देने की बात प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए। गोपाल गिरि महाराज ने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए इस पद को लेकर किसी भी प्रकार की मनमानी या भ्रम की स्थिति को समाप्त करना जरूरी है।
कनखल में रहने वाले कुछ लोगों पर भी उठाए सवाल
श्रीमहंत ने कनखल में रहने वाले कुछ संतों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग ज्योतिर्पीठ के क्षेत्राधिकार में रहते हुए ज्योतिर्पीठ के कार्य और मठ की व्यवस्थाओं के विपरीत गतिविधियां कर रहे हैं, जबकि उनके अनुसार वे ज्योतिर्पीठ के साधु भी नहीं हैं।
उन्होंने इस संबंध में तीखी उपमा देते हुए आरोप लगाया कि जिस प्रकार बाहरी ताकतों द्वारा देश में लोगों को भेजने की बात कही जाती है, उसी प्रकार कुछ लोगों को साधु बनाकर अखाड़े में भेजे जाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य परंपरा और अखाड़ा परंपरा के ऐतिहासिक स्वरूप को समझना जरूरी है और इसी आधार पर वर्तमान विवादों का समाधान होना चाहिए।
जगद्गुरु आश्रम की संपत्ति को लेकर लगाए गंभीर आरोप
श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने एक कथित शंकराचार्य पर जगद्गुरु आश्रम की संपत्तियों को ठिकाने लगाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु आश्रम के संस्थापक स्वामी प्रकाशानंद गिरि के कई अन्य शिष्य भी हैं और उनके अनुसार इनमें से योग्य व्यक्ति को आश्रम की महंताई की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उन्होंने अखाड़ा परिषद से पूरे मामले की जांच कराने और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति एवं परंपरागत व्यवस्था को सुरक्षित रखने की मांग की।
बोले- संत समाज को लेना होगा सामूहिक निर्णय
गोपाल गिरि महाराज ने कहा कि शंकराचार्य पद को लेकर बार-बार सामने आ रहे विवादों से श्रद्धालुओं और संत समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में अखाड़ा परिषद को सभी पक्षों को सुनकर परंपरा और धार्मिक व्यवस्था के अनुसार स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था शंकराचार्य अथवा आचार्य पद की परंपरा का गलत तरीके से इस्तेमाल कर रही है तो उसके विरुद्ध संत समाज को सामूहिक रूप से निर्णय लेना चाहिए।


