हरिद्वार। एक देश, एक चुनाव को लेकर रविवार को हरिद्वार के श्रीजी बैंकट हॉल में आयोजित हुए संत समागम में संस्कारी पार्टी के नेताओं ने संतों को चुना लगाकर स्वंय की पौ बारह कर ली। इतना ही नहीं स्वंय की पार्टी के कार्यक्रम जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिरकत की, में खलल डालने की भी भरपूर कोशिश की, जिससे स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज की छिछालेदार हो सके। मगर अंत तक वे अपनी चाल में कामयाब नहीं हो पाए। कार्यक्रम में खलल डालने का भले की उनका पासा सही न पड़ा हो, किन्तु अपनी जेब गरम कर उन्होंने संतों को चुना लगाने का कार्य पूरी शिद्दत के साथ किया।
बता दें कि एक देश एक चुनाव को लेकर भाजपा द्वारा संत समागम का आयोजन किया गया था। जिसमें हरिद्वार के अतिरिक्त अन्य प्रदेशों के कई संतों ने शिरकत की। जहां सभी ने एक स्वर में एक देश, एक चुनाव को सही ठहराया और इसके पक्ष में अपनी-अपनी दलीलें भी दीं।
जहां कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भाजपा द्वारा पूरे प्रयास किये गए थे, वहीं संस्कारी पार्टी के कुछ नेता संतों को ही चुना लगाने में लगे रहे और इसके लिए उनके एक पखवाड़ा पूर्व प्रयास शुरू हो गए थे। सूत्र और चर्चा के मुताबिक संस्कारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कार्यक्रम के नाम पर शहर से कुछ प्रतिष्ठित संतों और अन्यों से धनवसूली की। जिसके चलते करीब 12 से 15 लाख रुपये एकत्रित करने की चर्चा है।
वहीं कार्यक्रम का समूचा खर्च प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम के परमाध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज द्वारा किया गया। वहां आए अतिथियों के भोजन-प्रसाद की व्यवस्था भी उनके द्वारा की गयी। वहां सम्मान के लिए अंगवस्त्र व फूल आदि भी महामण्डलेश्वर स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश महाराज द्वारा उपलब्ध कराए गए। बैंकट हॉल तो उनका था ही। मगर संस्कारी पार्टी के एक नेता ने भोजन आदि व्यवस्था के लिए संतों के साथ शहर के कुछ लोगों को चुना लगाकर अपना उल्लू सीधा करने का कार्य बखूबी किया।
वैसे आपकों यहां बता दें कि संतों को चुना लगाने वाले नेता जी शिवालिकनगर निवासी उन महाशय नेता के गुरु बताए गए हैं, जो विगत दिनों 18 लाख की धोखाधड़ी में गिरफ्तार हो चुके हैं। इतना ही नहीं गिरफ्तार होने वाले नेता चुनाव में विस्तारक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इतना ही नहीं विगत दिनों प्रदेश के बड़े नेता और स्थानीय नेताओं के साथ गिरफ्तार हुए नेताजी की फोटो डालने के बाद उसे नेताजी की गिरफ्तारी होने के साथ हटा भी दिया गया।
मजेदार बात यह कि उधर चेला 18 लाख की धोखाधड़ी में गिरफ्तार हुआ और इधर गुरु ने संत समागम के नाम पर बड़ा खेला कर संतों को ही चुना लगा दिया। वैसे करीब 12 से 15 लाख की रकम कम नहीं होती। वहीं चुना लगाने वाले नेताजी ने उन संतों को नहीं छेड़ा, जिनसे चंदे की रकम सार्वजनिक होने की उम्मीद थी। मगर क्या करें, जिनसे उम्मीद नहीं थी उन्होंने ही नेताजी का कांड़ कर दिया।


