2010 के अनुबंध पर उठे सवाल, करार खत्म करो या नियम सबके लिए एक करो
हरिद्वार। अखाड़ों की परंपरा और महामंडलेश्वर व्यवस्था को लेकर श्री पंख् शंभू दशनाम आवाहन अखाड़े में नया विवाद तूल पकड़ता नजर आ रहा है। आवाहन अखाड़े को लेकर उठी मांग में 21 जनवरी 2010 के जूना अखाड़े और आवाहन अखाड़े के अनुबंध को समाप्त करने की बात कही गई है। साथ ही सवाल उठाया गया है कि यदि श्री शम्भू पंच दश नाम आवाहन नागा सन्यासी ” गोसाईयान” अलग और श्री पंच दश नाम आवाहन अखाड़ा अलग नही तो आवाहन अखाड़े को सात महामंडलेश्वर बनाने का अधिकार है, तो फिर अन्य अखाड़ों के लिए भी समान अनुपात और स्पष्ट नियम क्यों नहीं?
“तीन में से एक फैसला करो”
अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने उठाई गई मांग में कहा है कि मामले में तीन विकल्पों में से किसी एक पर निर्णय होना चाहिए, आवाहन अखाड़े की अलग व्यवस्था हो, सभी अखाड़ों के लिए महामंडलेश्वर बनाने के समान नियम तय हों या फिर आवाहन अखाड़े को महामंडलेश्वर बनाने की स्वतंत्रता दी जाए।
मांग रखते हुए आवाहन अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने प्रस्तावित अनुपात का भी उल्लेख किया है, जिसके अनुसार आवाहन अखाड़े के सात महामंडलेश्वर होने की स्थिति में अटल के छह, महानिर्वाणी के पांच, आनंद के चार, निरंजनी के तीन, अग्नि के दो और जूना अखाड़े के एक महामंडलेश्वर होने की व्यवस्था की बात कही गई है।
“21 जनवरी 2010 का अनुबंध खत्म किया जाए”
श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने सबसे अहम मांग 21 जनवरी 2010 को जूना अखाड़े द्वारा आवाहन अखाड़े के साथ किए गए अनुबंध को समाप्त करने की है। इस अनुबंध में अखाड़ा परिषद के महामंत्री का उल्लेख होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
अब निगाहें अखाड़ा परिषद और संबंधित अखाड़ों के निर्णय पर टिक गई हैं। क्या 2010 का अनुबंध समाप्त होगा? क्या महामंडलेश्वर व्यवस्था के नियम बदलेंगे? या फिर इस विवाद का कोई नया रास्ता निकलेगाकृयह आने वाले दिनों में साफ होगा।


