त्याग का उपदेश, जमीन का कारोबार! हरिद्वार में चर्चित संत पर गंभीर आरोप

ब्रह्मलीन संत की भूमि बिक्री पर विवाद, संत समाज में उठे गंभीर सवाल


हरिद्वार। धर्म और त्याग का संदेश देने वाले संत समाज से जुड़े एक चर्चित मामले ने हरिद्वार में नई बहस छेड़ दी है। जगजीतपुर क्षेत्र स्थित एक ब्रह्मलीन संत की भूमि के कथित रूप से बेचे जाने की खबरों ने संत समाज और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार एक चर्चित संत द्वारा उक्त भूमि का सौदा गुजरात के कुछ लोगों के साथ किए जाने की चर्चा है।


बताया जा रहा है कि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उस पर संबंधित संत के अधिकार को लेकर पहले से ही प्रश्न उठते रहे हैं और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि भूमि का उपयोग भविष्य में भगवान सत्यनारायण मंदिर निर्माण के लिए किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि भूमि हस्तांतरण और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।


मामले को लेकर संत समाज के कुछ वर्गों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि भूमि वास्तव में किसी ब्रह्मलीन संत या आश्रम की संपत्ति थी तो उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया और वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि भूमि बिक्री से पूर्व संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।


गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व आश्रमों और संतों की संपत्तियों पर अवैध कब्जों तथा विवादित लेन-देन को रोकने के लिए एक समिति गठित किए जाने की घोषणा की गई थी। समिति ने संतों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों की सुरक्षा का दावा किया था, लेकिन अब तक ऐसे मामलों में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। यही कारण है कि समिति की सक्रियता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।


कुछ लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं और आश्रमों की संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि पाखंडी बाबा अब तक करीब 90 करोड़ की संपत्ति को बेच चुका है।


लोगों का कहना है कि धर्म का चोला पहन कर पाखंड करने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। त्याग का उपदेश देने वाले धन की लालसा में अंधे हो चुके है। सरकारों की कार्यप्रणाली के कारण ऐसे लोगों के हौंसले बुलंद हैं। सब कुछ जानने के बाद भी सरकार इन पाखंडियों के खिलाफ कोई कारवाही नहीं करती है। जबकि ऑपरेशन कालनेमि चलकर भिक्षावृत्ति करने वालों को परेशान किया जा रहा है। जबकि वास्तविक कालनीमियों का अर्चन पूजन किया जा रहा है। लोगों का कहने है की जबतक वास्तविक कालनेमियों पर कारवाही नहीं होती तब तक धर्म की रक्षा नहीं की जा सकती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *