कुंभ में धर्म ध्वजारोहण के समय को लेकर विवाद, हरि गिरि महाराज के हंगामे पर संतों ने उठाए सवाल

संत बोले- सदियों पुरानी परंपरा में बदलाव की मांग का औचित्य नहीं


सिंहस्थ कुंभ के लिए प्रस्तावित धर्म ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक हरि गिरि महाराज के हंगामे का मामला संत समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। बैठक में पालक मंत्री गिरीश महाजन और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शेखर सिंह की मौजूदगी में तैयारियों की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान त्रयबक राजा के मुकुट के प्रतीक को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

त्रयबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे ने कहा कि समीक्षा बैठक में रखा गया मुकुट केवल डेमो के तौर पर था, ताकि उपस्थित लोग उसे देखकर आवश्यक सुझाव दे सकें। उनके अनुसार, इस प्रतीक को लेकर विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म ध्वजारोहण समारोह में शंकराचार्य की मौजूदगी को लेकर कुछ अखाड़ों के संत स्वयं को अपेक्षाकृत कम महत्व दिए जाने की भावना से वर्चस्व की राजनीति कर रहे हैं।

सदियों पुरानी परंपरा में बदलाव की मांग पर सवाल
वैष्णव तीनों अणी अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि नाशिक और त्रयबकेश्वर में धर्म ध्वजा रोहण की परंपरा लंबे समय से एक ही समय पर होने की रही है। ऐसे में दोनों स्थानों के कार्यक्रमों के बीच 10-20 मिनट का अंतर रखने की मांग पर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में सभी अखाड़ों की सहभागिता और समन्वय जरूरी है। साथ ही उन्होंने प्रशासन से संतों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए पर्याप्त सतर्कता बरतने की मांग की।

अखाड़ा परिषद की भूमिका को लेकर भी उठे सवाल
बैठक में हरि गिरि महाराज की मौजूदगी को लेकर भी कुछ संतों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बैठक में संबंधित अखाड़े के अधिकृत श्रीमहंत या ऐसे पदाधिकारी को भेजा जाना चाहिए, जिसे अखाड़े की ओर से अधिकृत किया गया हो।
कुछ संतों का तर्क है कि यदि कोई व्यक्ति अखाड़ा परिषद के पदाधिकारी के रूप में बैठक में शामिल होता है तो उसके पास संबंधित पद की वैधता और बहुमत का आधार होना चाहिए। संतों ने मेला प्रशासन से मांग की कि भविष्य की बैठकों में उन्हीं संतों को शामिल किया जाए, जिनके पास अखाड़े की ओर से अधिकृत पत्र हो या जो विधिवत परिषद के पदाधिकारी हों।

प्रयागराज की घटना का भी किया उल्लेख
भक्ति चरण दास महाराज ने प्रयागराज की एक पूर्व बैठक का उल्लेख करते हुए जिसमें वैष्णव अखाड़े के एक श्रीमहंत पर हमला किया गया था, को देखते हुए प्रशासन को आगाह किया कि संतों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद या टकराव दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कुंभ जैसे बड़े आयोजन में सभी अखाड़ों और संतों के बीच समन्वय बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल धर्म ध्वजारोहण के समय और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर उठे विवाद ने सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच संत समाज में नई चर्चा छेड़ दी है। प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि परंपरा, सभी अखाड़ों की सहभागिता और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय कायम किया जाए।

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