जैनी उर्फ इंद्राणी देऊड़ी ने की बेटे को न्याय और पिता का नाम दिलाने की गुहार, दोबारा सीबीआई जांच की मांग

2003 के चर्चित दुष्कर्म प्रकरण में पीड़िता ने मांगी सीबीआई जांच, डीएनए टेस्ट की उठाई मांग
देहरादून।
उत्तराखंड के वर्ष 2003 के चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले में पीड़िता ने शनिवार को देहरादून प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर जैनी उर्फ इंद्राणी देऊड़ी ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से मामले को दोबारा खोलकर सीबीआई जांच कराने और डीएनए परीक्षण कराने की मांग की। पीड़िता ने अपने बेटे को न्याय दिलाने और उसे पिता का नाम दिलाने की गुहार लगाई।

पीड़िता ने कहा कि वह केवल अपनी बात रखने के लिए देहरादून आई हैं और इसके बाद असम लौट जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, इसलिए वह उत्तराखंड में नहीं रुक सकतीं। उन्होंने कहा कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, वह न्याय की लड़ाई के लिए उत्तराखंड आती रहेंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने का प्रयास किया गया, उसी तरह उन्हें भी न्याय दिलाया जाए।

मामले को लेकर प्रदेश में हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर पीड़िता ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनके नाम का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई उनका नाम लेकर अनावश्यक बयानबाजी करेगा तो वह उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगी। उन्होंने महेंद्र भट्ट को जानने से भी इनकार किया और कहा कि उनका डीएनए परीक्षण कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 में जब वह महज 16 वर्ष की थीं, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उन्हें मानसिक चिकित्सालय में भी रखा गया और गर्भावस्था के समय प्रताड़ित किया गया। उनके अनुसार, वह करीब डेढ़ महीने तक तत्कालीन मंत्री के यहां रहीं और इस दौरान उन्हें अलग-अलग होटलों में ले जाया जाता था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के बाद भी उनके साथ जबरदस्ती की गई। पीड़िता ने पूर्व में हुई सीबीआई जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनसे एक कागज पर हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन जांच एजेंसी की टीम ने उनसे कभी मुलाकात नहीं की। उन्होंने पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से जांच कराने की मांग की।

इससे पहले पीड़िता ने पुलिस मुख्यालय में डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने मामले को दोबारा खोलने, सीबीआई से जांच कराने और डीएनए परीक्षण की मांग रखी। पीड़िता का कहना है कि उनकी लड़ाई अपने बेटे को न्याय और पहचान दिलाने के लिए है।

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