हरिद्वार। बीते रोज हरिद्वार में हुए एक अस्थि विसर्जन को लेकर शहरभर में चर्चाओं का माहौल बना रहा। अस्थि विसर्जन में कई प्रतिष्ठित और नामचीन लोग मृतात्मा की शांति के लिए श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए शामिल हुए, लेकिन कुलगुरु की गैरमौजूदगी ने लोगों के बीच तमाम सवाल खड़े कर दिए।
जानकारी के अनुसार, मृतक परिवार से वर्षों से जुड़े रहे कुलगुरु को अस्थि विसर्जन की सूचना पहले से थी। इसके बावजूद वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और कथित तौर पर निजी यात्रा एवं सैर-सपाटे के लिए रवाना हो गए।
लोगों का कहना है कि जिस परिवार ने कुलगुरु को सम्मान, पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा दिलाने में अहम भूमिका निभाई, उसी परिवार के दुःख के समय उनका साथ न देना बेहद हैरान करने वाला है। अस्थि विसर्जन जैसे भावनात्मक कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति दिनभर चर्चाओं का विषय बनी रही।
कार्यक्रम में शामिल कई लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि कुलगुरु ने वर्षों तक परिवार के नाम और संबंधों का लाभ उठाया, लेकिन जब परिवार पर दुःख की घड़ी आई तो उन्होंने दूरी बना ली। इस व्यवहार को लेकर सामाजिक और धार्मिक हलकों में भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
हालांकि, कुलगुरु की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। वहीं, शहर में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म बना हुआ है।
सूत्र बताते हैं कि हालांकि अनुपस्थित रहने वाले महाशय कुलगुरु नहीं हैं। किन्तु अपना प्रभाव समाज में बनाने और लोगों को ठगने के लिए वह स्वंय को परिवार का कुलगुरु प्रदर्शित करते आए हैं।


