कंधोें पर गड़ी कील, उसमें बंधी कांवड़, बहता रक्त, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए निकला कांवडि़या
हरिद्वार। आस्था के हजार होते रंग हैं। जिसको जो भा जाए वह उसी में रम जाता है। कोई ध्यान लगाकर परमात्मा को भजता है तो कोई जप और तप के करण उसको मनाने का कार्य […]









