नेशनल डॉक्टर डे : सेवा, समर्पण और निस्वार्थता का पर्व

डॉक्टर्स कौन हैं? मैं डॉक्टर्स को भगवान का राइट हैंड यानी सीधा हाथ कहता हूँ, और जो उनके साथ नर्स और बाकी स्टाफ हैं, उन्हें मैं बायाँ हाथ कहता हूँ। क्योंकि कोई भी चीज बनती है, तो उसकी मरम्मत भी होती है। मरम्मत के लिए कंपनी किसी को अधिकृत करती है। वैसे ही भगवान ने इस शरीर रूपी गाड़ी की मरम्मत करने का अधिकार डॉक्टर को दिया। शरीर में कुछ भी नुक्स या कष्ट आए, तो उसकी मरम्मत डॉक्टर करेगा। इसलिए हमने डॉक्टर को भगवान का राइट हैंड कहा। जिंदा इंसान को भगवान ने बनाया, और उसकी मरम्मत करने के लिए एक इंसान बनाया जिसे डॉक्टर कहते हैं।

कोई ऐसे ही डॉक्टर नहीं बन जाता। किसी का दिमाग तेज नहीं होता, इसलिए कभी घमंड नहीं करना है कि मेरा दिमाग बहुत तेज है। गर्भ से नौ महीने में सब पैदा होते हैं, मल-मूत्र से बाहर आते हैं। ये चमड़ी, मिट्टी की है, अंदर वही खून, हड्डी है और दिमाग सबका एक सा है। माया संसार में सदा दो रूपों में चलती है। डॉक्टर भी माया है क्योंकि उनको मरे हुए शरीर की मरम्मत करने के लिए कहा गया है, चेतना का वो कुछ नहीं कर सकते। शरीर से आत्मा के बाहर आते ही डॉक्टर भी कहते हैं, “भगवान की मर्जी” क्योंकि डॉक्टर को भी छह फुट के शरीर में इतना ही रोल दिया गया है। डॉक्टर इस मिट्टी के, चमड़े के शरीर को सही कर सकता है, पर अंदर की आत्मा को नहीं, क्योंकि आत्मा विराट स्वरूप है, और परमात्मा सारे ब्रह्मांड के पार है। डॉक्टर को छः फुट के इस मरे हुए शरीर में मरीज को हाथ लगाने का रोल दिया गया है, पर अगर तुम अपने को डॉक्टर समझ बैठे हो और अहंकार कर लिया, मैं एमडी, मैं डीएम, तो तुम भी मायावी हो गए और अहंकारी हो गए। तुम्हारे को सिर्फ डॉक्टर का रोल मिला है। “मैं” कुछ हूँ, यह अहंकार मत करो। बस एक ही शब्द का ध्यान रखो।

जितने भी परमात्मा स्वरूप दुनिया में आए जैसे श्रीराम, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध, महावीर, जीसस, मोहम्मद, कबीर, फरीद, मीरा बाई, सहजो बाई, लल्ला बाई वगैरह, सबने एक ही शब्द कहा है, क्या? ‘मैं’ नहीं, अहंकार नहीं। जब ‘मैं’ नहीं तो ‘मेरा’ क्या? सब खेल है। ये ‘मैं’ तुम्हारे अंदर नहीं जानी चाहिए, परन्तु बाहर तो रहेगी क्योंकि बाहर का खेल तो खेलना है ना! जैसे कि एक किरदार अपनी भूमिका अदा करता है।

डॉक्टर परमात्मा का सीधा हाथ है, परमात्मा नहीं। वो परमात्मा भी हो सकता है, परन्तु कब? जब वो अपनी ‘मैं’ से उठ जाएगा। डॉक्टर के पास परमात्मा को पाने का सबसे बढ़िया मौका है, क्योंकि उसकी तो हर वक्त साधना चल रही है। पर अगर तुम परमात्मा के बनाए दूसरे शरीर का दुरुपयोग कर रहे हो, तो सजा मिलेगी । अगर दूसरों के शरीरों से खिलवाड़ करोगे, जैसे कि जबरदस्ती टेस्ट करवा लेना, ‘नहीं-नहीं करा के ही आओ,’ जबरदस्ती कीमो करवाना, या कमीशन के लिए ये सब करना, तो मरोगे और अगले जन्म में खुजली वाला कुत्ता, बंदर, लोमड़ी बनोगे। इसका फल भुगतना पड़ेगा।

तो तुम परमात्मा भी हो सकते हो और शैतान भी। तुम परमात्मा का सीधा हाथ हो और अगर इसका दुरुपयोग करोगे, तो हर कर्म का हिसाब-किताब होगा। इसलिए हम डॉक्टर डे पर यही चाहेंगे कि हर डॉक्टर, परमात्मा का दूत, परमात्मा होने के लिए अपनी साधना में जुटे। परमात्मा के बनाए शरीरों को, अपने ही भाई, बहनों के साथ लूटपाट ना करे, खासकर जिनकी आर्थिक स्थिति ही अच्छी नहीं है। नहीं तो उसे एक-एक घड़ी का हिसाब देना पड़ेगा और निष्काम, निस्वार्थ सेवा की तो परमात्मा खुद ही आ जाएंगे, और तुम्हें परमात्मा कर देंगे। तुम्हारा जन्म भी सफल हो जाएगा। जब शरीर से निकलोगे तो ब्रह्म दूत आएँगे। इसलिए उम्मीद करता हूँ कि इस डॉक्टर्स डे पर डॉक्टर और उनके साथ का जो भी स्टाफ है, परमात्मा के रास्ते पर कहीं भूल हो तो अपने को सुधारेंगे। और जो पहले से सेवा में चल रहे हैं, उनके लिए मेरा बहुत-बहुत प्यार है। इसलिए आज का ये दिन उनका है,और मुझे उम्मीद है कि सब परमात्मा को जरूर पाएँगे।

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