12वें प्रशिक्षण चरण में डॉ. नरेश चौधरी ने साझा किए चार दशक के अनुभव, कहा- स्थानीय लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता से सफल होगा कुंभ
हरिद्वार। कुंभ मेला 2027 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए मेला पुलिस को विशेष सतर्कता, बेहतर समन्वय और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। भीड़ प्रबंधन से लेकर अमृत स्नान और अखाड़ों की पेशवाई तक प्रत्येक आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए सभी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता जरूरी है। यह बात इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रोफेसर (डॉ.) नरेश चौधरी ने मंगलवार को सशस्त्र पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, हरिद्वार में कुंभ मेला पुलिस के 12वें प्रशिक्षण चरण के दौरान कही।
कुंभ मेला 2027 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस कार्मिकों का प्रशिक्षण पिछले माह से लगातार चल रहा है। प्रत्येक चरण में कुंभ और अर्द्धकुंभ मेलों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ अधिकारियों को मुख्य प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। इसी क्रम में चार दशकों से विभिन्न कुंभ मेलों, अर्द्धकुंभ मेलों, स्नान पर्वों और महत्वपूर्ण आयोजनों में दायित्व निभा चुके डॉ. नरेश चौधरी ने पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षु पुलिस कार्मिकों को अपने अनुभवों से अवगत कराया।
पिछले आयोजनों से अधिक हो सकती है श्रद्धालुओं की संख्या
डॉ. चौधरी ने कुंभ मेले के इतिहास और आगामी आयोजन की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 2027 का कुंभ मेला भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से बेहद संवेदनशील रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ और उज्जैन के स्नान पर्वों की समयावधि के बीच पहले सामंजस्य रहता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2021 में आयोजित हरिद्वार कुंभ की परिस्थितियां अलग थीं। उज्जैन में अगला कुंभ वर्ष 2028 में और नासिक में जुलाई 2027 में आयोजित होना निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि कुंभ 2027 में श्रद्धालुओं और यात्रियों की संख्या पूर्व में आयोजित मेलों की तुलना में अधिक रहने की संभावना है। अमृत स्नानों और अखाड़ों की पेशवाई के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में पुलिसकर्मियों को भीड़ की स्थिति के अनुसार त्वरित निर्णय लेने, व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए तैयार रहना होगा।
स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की भूमिका अहम
डॉ. चौधरी ने कहा कि हरिद्वार के स्नान पर्वों और कुंभ मेले को सुचारु रूप से संपन्न कराने में स्थानीय निवासियों, दुकानदारों, व्यापारियों, होटल और धर्मशाला संचालकों, सामाजिक संस्थाओं तथा स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इन सभी की सक्रिय सहभागिता से बड़े से बड़े आयोजन भी सरलता और सहजता से संपन्न कराए जा सकते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि मेला प्रशासन, पुलिस और आयोजन से जुड़ी सभी संस्थाओं को आपसी समन्वय बनाए रखना चाहिए। जरूरत के अनुसार स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लेकर एक सशक्त टीम के रूप में कार्य करना होगा। प्रत्येक कार्मिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पारदर्शिता, संवेदनशीलता और पूरी कर्मठता के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
चार दशक के अनुभवों से कराया रूबरू
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नरेश चौधरी ने वर्ष 1986, 1992 और 1998 के कुंभ, वर्ष 2004 के अर्द्धकुंभ, वर्ष 2010 के कुंभ, वर्ष 2011 के शांतिकुंज शताब्दी कुंभ, वर्ष 2016 के अर्द्धकुंभ और वर्ष 2021 के हरिद्वार कुंभ में निभाई गई जिम्मेदारियों के अनुभव साझा किए। इसके साथ ही उन्होंने प्रयागराज, उज्जैन और नासिक कुंभ में अपने दायित्वों के दौरान सामने आई परिस्थितियों से भी प्रशिक्षणार्थियों को अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि पिछले आयोजनों से मिले अनुभव आगामी कुंभ की तैयारियों में महत्वपूर्ण साबित होंगे। बेहतर योजना, प्रभावी भीड़ प्रबंधन, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता के माध्यम से कुंभ मेला 2027 को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सकता है।

