विनोद धीमान
हरिद्वार। लक्सर में तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। बहादुरपुर में स्कूल से घर लौट रही कक्षा 6 की 12 वर्षीय छात्रा दिव्या की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। मासूम की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है, वहीं स्थानीय लोगों में पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।
बताया गया कि दिव्या रोज की तरह स्कूल की छुट्टी के बाद अपने दादा के साथ बाइक से घर लौट रही थी। बहादुरपुर मार्ग पर पीछे से आए तेज रफ्तार और ओवरलोड ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि दिव्या गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि उसके दादा को मामूली चोटें आईं।
परिजन आनन-फानन में दिव्या को अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में मासूम ने दम तोड़ दिया। एक पल में परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।
हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि स्कूल समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक के बावजूद आखिर ट्रक सड़क पर कैसे दौड़ रहे थे? स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ढिलाई और कमजोर निगरानी के कारण ओवरलोड व तेज रफ्तार वाहन बेखौफ सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई अक्सर कागजों तक सीमित रहती है, जबकि जमीनी स्तर पर सख्ती नदारद है। यही वजह है कि लगातार हो रहे हादसों में निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि फरार ट्रक चालक की तलाश की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी बरकरार है, क्या सिर्फ गिरफ्तारी से सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों पर लगाम लग पाएगी? या फिर किसी और मासूम की जान जाने के बाद ही सिस्टम जागेगा? लक्सर में दिव्या की मौत ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।


