बर्बरीक सेना का गठन, धर्म, गाय रक्षा और दीन-दुखियों की सेवा का लिया संकल्प

बाबा श्याम के मूल मंत्र ‘हारे का सहारा’ को लेकर देशभर में सेवा का संकल्प : सुमितानंद


हरिद्वार। धर्म रक्षा, राष्ट्र सेवा और दीन-दुखियों की सेवा के उद्देश्य से देश के विभिन्न राज्यों के संतों ने बाबा श्याम के शीश दान स्थल चुलकाना धाम, पानीपत (हरियाणा) में बर्बरीक सेवा का विधिवत गठन किया है। सेवा का उद्देश्य बाबा श्याम के मूल मंत्र ‘हारे का सहारा’ को आत्मसात करते हुए जरूरतमंदों की सहायता करना, धर्म की रक्षा करना और समाजहित में सेवा कार्यों को आगे बढ़ाना है।


हरिद्वार के भूपतवाला में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बर्बरीक सेना के अध्यक्ष स्वामी सुमितानंद महाराज ने बताया कि बीते रोज हरियाणा के पानीपत जिले स्थित चुलकाना धाम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संतों की मौजूदगी में बर्बरीक सेवा का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि चुलकाना धाम वह पवित्र स्थल है, जहां बाबा श्याम ने धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश का दान किया था। आज भी इस पवित्र धाम में बाबा श्याम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।


स्वामी सुमितानंद महाराज ने कहा कि बर्बरीक सेना बाबा श्याम के आदर्शों और उनके त्याग की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेगी। सेवा के माध्यम से समाज के कमजोर, जरूरतमंद और दीन-दुखियों की सहायता के साथ ही धर्म रक्षा, गाय और राष्ट्र सेवा के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने संत समाज और सनातन धर्मावलंबियों से बर्बरीक सेवा से जुड़कर सेवा कार्यों को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि बर्बरीक सेवा के गठन के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरी महाराज, हरिद्वार को अंतरराष्ट्रीय संरक्षक, सुमित आनंद महाराज को अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष तथा स्वामी संतोष पुरी को अंतरराष्ट्रीय संगठन मंत्री मनोनीत किया गया है।


इसके अलावा माता राधिका, दिल्ली को अध्यक्ष, दास महाराज, ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष, दीपक पुजारी को हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष, स्वामी शंकरानंद पुरी को महाराष्ट्र अध्यक्ष तथा राजेश सिंह को मध्य प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेवा के विस्तार के लिए देश के अन्य राज्यों में भी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।


धर्म रक्षा के साथ सेवा कार्यों को विस्तार देने का संकल्प
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरी महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में सेवा को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। बाबा श्याम के जीवन और उनके त्याग से समाज को परोपकार, समर्पण और जरूरतमंदों के साथ खड़े होने की प्रेरणा मिलती है। बर्बरीक सेना के माध्यम से धर्म रक्षा के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत समाज को एकजुट होकर धर्म, संस्कृति और मानव सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।


स्वामी सुमितानंद महाराज ने कहा कि बर्बरीक सेना किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। देश के विभिन्न राज्यों में सेवा से जुड़े संतों और कार्यकर्ताओं के सहयोग से जरूरतमंदों की मदद, सामाजिक सेवा, धार्मिक जागरूकता और धर्म-संस्कृति के संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बाबा श्याम के ‘हारे का सहारा’ संदेश को सेवा का आधार बनाकर संगठन समाज के बीच कार्य करेगा।


उन्होंने बताया कि बर्बरीक सेना का गठन देशभर के संतों की मौजूदगी और सहमति से किया गया है। आने वाले समय में संगठन की गतिविधियों को व्यापक स्तर पर विस्तार दिया जाएगा और अधिक से अधिक संतों तथा समाजसेवियों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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