“कौन सही, कौन गलत?” बड़ा उदासीन विवाद ने बढ़ाई हलचल
हरिद्वार। पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन से जुड़ा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। अखाड़े की संपत्तियों, बैंक खातों और प्रबंधन को लेकर साधु-संतों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
उल्लेखनीय है कि रजिस्ट्रार सोसाइटीज चिट्स एंड फंड, प्रयागराज द्वारा 22 अप्रैल को जारी आदेश में अखाड़े से जुड़े विभिन्न आश्रमों और संपत्तियों के बैंक खातों को सीज करने की कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद अखाड़े के भीतर चल रहे विवाद खुलकर सामने आने लगे हैं।
गंभीर आरोपों से बढ़ा विवाद
अखाड़े के एक धड़े द्वारा दूसरे धड़े के प्रमुख संतों और महंतों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर डाली गयी एक पोस्ट में एक संत ने आरोपों में कहा है कि अखाड़े की संपत्तियों को लीज पर देने के नाम पर अनियमितताएं की गईं और आर्थिक गड़बड़ियां सामने आई हैं। साथ ही कुछ संतों पर पद के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के भी आरोप लगाए गए हैं।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि अखाड़े की परंपराओं और नियमों की अनदेखी कर व्यक्तिगत लाभ के लिए फैसले लिए गए, जिससे संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
कोर्ट के आदेशों को लेकर भी सवाल
विवाद का एक अहम पहलू न्यायालय के आदेशों को लेकर भी सामने आया है। आरोप है कि कुछ पदाधिकारियों ने कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया और खुद को जबरन पद पर बनाए रखने की कोशिश की।
अखाड़े से जुड़े कई संतों और मुकामियों में भी असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। उनका कहना है कि विवाद के चलते धार्मिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं पर असर पड़ रहा है।
वहीं दूसरी ओर पोस्ट में अखाड़े के एक श्रीमहंत पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। जिसमें उनकी पोल पट्टी खोलने तक की बात कही है। बताया गया कि श्रीमहंत गोल गली के खिलाड़ी हैं। इस कारण से उन्हें ब्लैकमेल कर असंवैधानिक कार्य भी करवाए जा रहे हैं। जिस कारण से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। पोस्ट में शीघ्र ही गोल गली के राज खोलने की बात भी कही गयी है।
मामला अब प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर पहुंच चुका है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में कोर्ट और संबंधित विभागों के फैसले इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
सोशल मीडिया पर डाली गयी पोस्ट में लिखा
एक कहावत है पानी का हगा उतराता जरूर है, अर्थात तुम जो सोच रहे थे कि तुम्हारी करनी किसी को पता नहीं चलेगी, अब सबको पता चल चुका है कि तुमने अपने अन्य अखाड़ा माफिया साथियों के साथ मिलकर अखाड़े की संपत्तियों को लीज पर देने के नाम पर किस प्रकार खुर्द-बुर्द किया है। मैं तुम सब का काला चिट्ठा खोलूंगा चाहे वह गया का मुकामी हो या उज्जैन का मुकामी श्री महंत और तुम्हारे प्रश्रय में इनके द्वारा बेची गई संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा सबके सामने उजागर होने वाला है।
कहते हैं ऊंट की चोरी निहुरे निहुरे नहीं होती, उज्जैन के मकान/आश्रम में जो लूट मचा रखी है वह कहां जा रही है, यह पता चल चुका है तुम सब माफियाओं ने शादियां कर रखी हैं, तुम और तुम्हारे अखाड़ा माफिया साथी कैसे अखाड़े की संपत्ति को लीज पर दे सकते हैं? अखाड़े का कोई मुकामी महंत/ साधु बीमार पड़ जाता है, तो तुम उसकी दवा का पैसा नहीं निकलने देते। मुकामी यदि अपने लिए फल खरीद ले तो तुम उसके बिल नहीं निकलने देते हो और अपने फर्जी मुकदमों के लिए तुमने लाखों के बारे न्यारे कर दिए? तुम अखाड़े के मुकामियों और निर्माण मंडल को डरा धमका कर रखते हो, मूर्ख समझते हो? जिन्हें तुम मूर्ख समझते हो वह अब तक केवल सत् पंच परमेश्वर के सम्मान के कारण नहीं बोलते थे, लेकिन अब वह जान चुके हैं कि केवल अखाड़े को लूटने के लिए श्री महंत बनने का ढोंग कर रहा है। सत्य यह है कि इन लुटेरों को तुरंत अखाड़े से बाहर किया जाना चाहिए नहीं तो यह अखाड़े का समूल नाश कर देंगे।
श्री महंत ने जिन लड़कों का यौन शोषण किया उन्होंने उसकी वीडियो दिखाकर मुकामी पद हासिल किया अब वह अखाड़े को लूटेंगे नहीं तो और क्या करेंगे? माननीय न्यायालय का आदेश ना मानकर जबरन मुखिया बनने वाले जिन्हें कोर्ट ने मुखिया मानने से इनकार कर दिया, बैंक के खाते में जिनका नाम नहीं चढ़ा, वह जबरन उल्टे सीधे खर्च करके अखाड़े को चूना लगा रहे हैं, श्री सत्य पंच परमेश्वर की पूजा, दान दक्षिणा खा रहे हैं और हम श्री सत पंच परमेश्वर का अंग मानकर उनकी पूजा कर रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य इस अखाड़े के लिए और क्या हो सकता है? यह हम सब का कर्तव्य है कि हम अपनी आंखें खोलें, माननीय न्यायालय और रजिस्ट्रार सोसाइटीज एवं चिट फंडस के आदेश को पढ़ें समझे कि यह लोग अखाड़े को बदनाम भी कर रहे हैं और अखाड़े को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं। अपने घरों को भर रहे हैं अय्याशी में अखाड़े की अमूल्य संपत्ति को नष्ट कर रहे हैं अन्यथा अखाड़े को अपूर्णनीय नुकसान पहुंचेगा जिसके लिए आप सब उत्तरदाई होंगे।
फिलहाल, पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन का यह आंतरिक विवाद न केवल संगठन की छवि को प्रभावित कर रहा है, बल्कि संत समाज में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।


