अखाड़ों में दोहरे मापदंड? परिवार और ‘प्राइवेट चेलियों’ के आरोपों से घिरे कथित भगवाधारी

परिवार पालने वाले संतों पर कब होगी कार्रवाई? संत़ों में मचा घमासान

श्रीमहंतों के परिवार और आलीशान मकानों के आरोपों से गरमाया संत समाज

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा हाल ही में परिवार से संबंध रखने वाले संतों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के ऐलान के बाद संत समाज में हलचल तेज हो गई थी। परिषद के इस फैसले का कई संतों और धार्मिक संगठनों ने स्वागत भी किया था। हालांकि अब इसी मुद्दे पर अखाड़ों और बड़े मठों से जुड़े कुछ कथित भगवाधारियों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

विगत दिनों एक वीडियो संदेश में एक साध्वी ने एक अखाड़े और बड़े मठ से जुड़े एक बड़े श्रीमहंत पर गंभीर आरोप लगाए थे। साध्वी का दावा था कि दूसरों को परिवार रखने पर कार्रवाई की धमकी देने वाले एक श्रीमहंत स्वयं वृंदावन में पत्नी और बच्चों के साथ संबंध रखते हैं। इतना ही नहीं, पत्नी और बच्चों के होने के बावजूद उन्हें सार्वजनिक रूप से “नाजायज” का तमगा दिया गया है।


अब इस मामले में एक और नया खुलासा सामने आने का दावा किया जा रहा है। अखाड़ा सूत्रों के अनुसार हाल ही में एक मढ़ी में अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए एक श्रीमहंत ने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए आलीशान मकान बनवाया हुआ है। बताया जा रहा है कि परिवार के भरण-पोषण के लिए हर महीने मोटी रकम भी भेजी जाती है। सूत्रों का यह भी कहना है कि उक्त श्रीमहंत अपने परिवार का विशेष ख्याल रखते हैं और उनके निजी जीवन को लेकर संत समाज में लंबे समय से चर्चाएं चल रही हैं।


इतना ही नहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि कुछ कथित संतों की निजी “चेलियों” का नेटवर्क भी सक्रिय है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब अखाड़ा परिषद ने परिवार से जुड़े संतों पर कार्रवाई का एलान किया था, तो फिर परिवार चलाने और गृहस्थ जीवन जीने वाले प्रभावशाली संतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।


संत समाज के भीतर अब दोहरे मापदंडों को लेकर नाराजगी भी सामने आने लगी है। चर्चा यह भी है कि जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं, उन्हें कार्रवाई का सामना करने के बजाय महत्वपूर्ण पदों से सम्मानित किया जा रहा है।


इसी बीच यह मामला भी फिर चर्चा में आ गया है कि एक बड़े महंत के आश्रम से पूर्व में भगवाधारियों के साथ वैश्या की गिरफ्तारी हुई थी, जिसके बाद संत समाज की छवि पर भी सवाल उठे थे। अब लगातार सामने आ रहे आरोपों ने अखाड़ों की कार्यप्रणाली और अनुशासन व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

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