हरिद्वार। कनखल स्थित शेखपुरा-बैरागी कैंप की भूमि को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। श्री महंत गोपाल गिरि ने दावा किया है कि बैरागी कैंप की भूमि सरकारी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह ऐसी भूमि है जो पुराने बंदोबस्त से बाहर रही है और राजस्व अभिलेखों के अनुसार जमींदारी भूमि की श्रेणी में आती है।
महंत गोपाल गिरि के अनुसार, शेखपुरा-कनखल बैरागी कैंप की भूमि का वर्ष 1932-37 के बंदोबस्त में बंदोबस्त नहीं किया गया था। उनका कहना है कि ऐसी भूमि को पुराने राजस्व रिकॉर्ड में बंदोबस्त से बाहर रही भूमि माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस भूमि के मूल मालिक का नाम वर्ष 1903-05 के अभिलेखों में दर्ज है।
सिंचाई विभाग के नाम दर्ज होने पर भी उठाए सवाल
महंत गोपाल गिरि ने हरिद्वार सिंचाई विभाग के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बैरागी कैंप की भूमि से संबंधित विभाग के पास कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उनका दावा है कि खसरा-खतौनी में भी सिंचाई विभाग का नाम दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भूमि वास्तव में सरकारी संपत्ति है तो उसके समर्थन में संबंधित विभाग को राजस्व अभिलेख और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।
कुंभ मेले के लिए भूमि लेने का भी किया जिक्र
महंत गोपाल गिरि ने वर्ष 2002 में उत्तर प्रदेश सरकार से उत्तराखंड सरकार द्वारा कुंभ मेले के लिए भूमि मांगे जाने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस समय उत्तर प्रदेश सरकार ने हरिद्वार के शहरी क्षेत्रों में मौजूद अपनी भूमि में से कुछ हिस्सा उत्तराखंड सरकार को उपलब्ध कराया था, जबकि कुछ भूमि आज भी उत्तर प्रदेश सरकार के पास होने का उनका दावा है। उनका कहना है कि बैरागी कैंप, शेखपुरा-कनखल की भूमि के संबंध में न तो हरिद्वार सिंचाई विभाग के पास कोई दस्तावेज है और न ही ऐसी कोई जानकारी सामने आई है कि किसी जमींदार ने यह भूमि सरकार को हस्तांतरित की हो।
दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग
महंत गोपाल गिरि ने कहा कि बैरागी कैंप की भूमि को लेकर स्थिति भावनाओं या दावों के आधार पर नहीं, बल्कि पुराने राजस्व अभिलेखों और वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों से भूमि के स्वामित्व से जुड़े पुराने खसरा, खतौनी, बंदोबस्त अभिलेख और अन्य दस्तावेज सामने लाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष के पास भूमि पर स्वामित्व अथवा सरकारी अधिकार से संबंधित दस्तावेज हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।


