नवीन बिरला बोले, स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त कर पूरे मामले की हो जांच
हरिद्वार। कांवड़ मेले के दौरान नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विज्ञप्ति जारीकर्ता नवीन बिरला ने दावा किया कि कांवड़ मार्ग पर सफाई व्यवस्था के लिए स्वीकृत 110 कर्मचारियों के सापेक्ष कथित तौर पर 30 से अधिक फर्जी प्रविष्टियों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और मस्टर रोल में दर्ज प्रविष्टियों के बीच भी गंभीर अंतर है।
नवीन बिरला ने बताया कि 17 पीड़ित सफाईकर्मियों और जागरूक नागरिक प्रतिनिधियों की ओर से नोटरीकृत शपथपत्रों के माध्यम से मामले से संबंधित गंभीर शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखी गई हैं। शिकायत में कथित वित्तीय अनियमितता, फर्जी मस्टर रोल, मजदूरी में कटौती, नकद भुगतान, कर्मचारियों के उत्पीड़न और लंबे समय से एक ही क्षेत्र में तैनाती जैसे आरोप लगाए गए हैं।

110 कर्मचारियों की स्वीकृति, 30 से अधिक फर्जी नामों का दावा
नवीन बिरला के अनुसार कांवड़ मार्ग की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम की ओर से 110 सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। आरोप है कि मौके पर वास्तविक कर्मचारियों की संख्या कम रखकर मस्टर रोल में 30 से अधिक कथित फर्जी नाम दर्ज किए गए और इनके नाम पर सरकारी बजट से भुगतान निकाले जाने का दावा किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए मस्टर रोल, उपस्थिति रजिस्टर, कार्यादेश और भुगतान अभिलेखों का स्वतंत्र रूप से मिलान कराया जाना आवश्यक है।

मुहर और हस्ताक्षर से कागजी सत्यापन का आरोप
नवीन बिरला ने आरोप लगाया कि संबंधित मुख्य सफाई निरीक्षक द्वारा मौके पर सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन करने के बजाय कार्यालय स्तर पर सरकारी मुहर और हस्ताक्षर के माध्यम से कागजी अभिलेखों को प्रमाणित किया जा रहा था। उनका कहना है कि यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी धन के भुगतान और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
दो अलग-अलग उपस्थिति रजिस्टर संचालित करने का दावा
शिकायतकर्ताओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि वास्तविक उपस्थिति के लिए एक रजिस्टर और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड के लिए कथित तौर पर अलग रजिस्टर संचालित किया जा रहा था।
नवीन बिरला ने कहा कि इस आरोप की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अवधि के सभी उपस्थिति रजिस्टर, मस्टर रोल और भुगतान अभिलेख जब्त कर उनका आपस में मिलान कराया जाना चाहिए।
500 रुपये की मजदूरी में 100 से 150 रुपये कटौती का आरोप
नवीन बिरला ने बताया कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार सफाई कर्मचारियों के लिए निर्धारित 500 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी के मुकाबले उन्हें कथित रूप से केवल 350 से 400 रुपये तक नकद भुगतान किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रति कर्मचारी 100 से 150 रुपये तक की कथित कटौती की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि नकद भुगतान के दौरान पर्याप्त हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान या पहचान संबंधी अभिलेख दर्ज नहीं किए जाते।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सफाईकर्मियों के आर्थिक शोषण का गंभीर मामला होगा।
सीधे बैंक खाते में भुगतान की मांग
नवीन बिरला ने कहा कि मजदूरी का भुगतान पारदर्शी तरीके से सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में किया जाना चाहिए। उन्होंने नकद भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सभी भुगतान अभिलेखों, रसीदों, बैंक विवरणों और ठेकेदार के बिलों की जांच की मांग की।
महिला सफाईकर्मियों के उत्पीड़न का आरोप
नवीन बिरला ने बताया कि शिकायत में महिला सफाई कर्मचारियों और कथित रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ महिला कर्मचारियों को उनके मूल कार्यक्षेत्र से चार से पांच किलोमीटर दूर भेज दिया गया। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच होने तक ऐसे कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना से सुरक्षा दी जाए और महिला कर्मचारियों को उनके मूल कार्यक्षेत्र में वापस भेजा जाए।
जिलाधिकारी को सौंपे गए सात शपथपत्र
नवीन बिरला के अनुसार सात प्रमुख पीड़ित सफाई कर्मचारियों के नोटरीकृत शपथपत्र जिलाधिकारी हरिद्वार को सौंपे जा चुके हैं। उनका दावा है कि जिलाधिकारी के शिविर कार्यालय से पत्र संख्या 183, दिनांक 6 अगस्त 2026 के माध्यम से शिकायत नगर आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। उन्होंने बताया कि शेष दस पीड़ित कर्मचारी जांच अधिकारी नियुक्त होने के बाद अपने बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।
मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न आयोगों तक पहुंचा मामला
नवीन बिरला ने बताया कि शिकायत की प्रतियां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, शहरी विकास मंत्री, श्रम मंत्री, सतर्कता अधिष्ठान, मानवाधिकार आयोग, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग, अनुसूचित जाति आयोग और महिला आयोग सहित संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के आंतरिक तंत्र के बजाय किसी स्वतंत्र वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जांच कराई जानी चाहिए।
स्वतंत्र जांच अधिकारी की नियुक्ति की मांग
नवीन बिरला ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए किसी वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अथवा प्रांतीय सिविल सेवा अधिकारी को स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान मस्टर रोल, उपस्थिति रजिस्टर, कार्यादेश, कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, भुगतान अभिलेख और ठेकेदार के बिलों का गहन मिलान कराया जाए, ताकि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
दोषियों पर कार्रवाई और मजदूरी की वसूली की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी, ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही कर्मचारियों से कथित रूप से काटी गई मजदूरी की वसूली कर उन्हें वापस दिलाई जाए।
नवीन बिरला ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को उनका पूरा पारिश्रमिक मिले और भविष्य में मजदूरी भुगतान में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो, इसके लिए भुगतान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जानी चाहिए।


