गुरु भारतीय संस्कृति की आत्मा : स्वामी राजेंद्रानन्द गिरी

गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य समापन, श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन कर लिया सनातन रक्षा का संकल्प


हरिद्वार। श्री पंचायत अखाड़ा निरंजनी के महामंडलेश्वर स्वामी राजेंद्रानन्द गिरी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित पांच दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य समापन हो गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु पूजन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर सनातन धर्म की रक्षा और उसके मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लिया।


महोत्सव के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, गुरु वंदना, भजन-कीर्तन, प्रवचन तथा गुरु दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और धर्म, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों के पालन का संकल्प दोहराया।


पांच दिवसीय महोत्सव में विशाल अटूट भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं जरूरतमंद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर सेवा, समर्पण और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।


समापन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी राजेंद्रानन्द गिरि महाराज ने कहा कि गुरु भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। गुरु ही शिष्य को सत्य, धर्म और मानवता का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन संस्कृति की रक्षा, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सफल और समाज को सशक्त बना सकता है।


उन्होंने श्रद्धालुओं से सनातन धर्म के आदर्शों को अपनाने, समाज में प्रेम, सद्भाव और सेवा की भावना को बढ़ाने तथा आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।


महोत्सव के दौरान गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, दक्षिणा और अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया। संतों ने इसे सेवा ही सच्चा धर्म बताते हुए समाज के सक्षम लोगों से जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया।


आयोजन के समापन पर देशभर से आए श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों में सहभागी बनने का संकल्प लिया। पूरे महोत्सव में श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का वातावरण बना रहा।

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