हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने हरिद्वार के संत समाज में हलचल मचा दी है। पोस्ट में उनके संबंध में हत्या होने अथवा महंत नरेंद्र गिरि की तरह आत्महत्या करने जैसी आशंका जताई गई थी। हालांकि कुछ ही देर बाद संबंधित पोस्ट को हटा दिया गया, लेकिन उसका स्क्रीनशॉट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बताया जा रहा है कि यह पोस्ट “नवीन शर्मा” नाम की एक फेसबुक प्रोफाइल से की गई थी। पोस्ट में अखाड़े की संपत्ति से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए श्रीमहंत रविंद्र पुरी पर गंभीर आशंकाएं व्यक्त की गईं। साथ ही कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की गईं और आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि का भी उल्लेख किया गया।
फिलहाल इस पूरे मामले में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट अथवा श्रीमहंत रविंद्र पुरी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि वायरल पोस्ट के संबंध में पुलिस को कोई शिकायत दी गई है या नहीं।
जानकारों का कहना है कि पोस्ट में लगाए गए आरोपों की फिलहाल कोई पुष्टि नहीं हुई है और इन दावों को सत्यापित करने वाला कोई आधिकारिक साक्ष्य भी सामने नहीं आया है। इसलिए सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
हाल के दिनों में अखाड़े की संपत्ति से जुड़े एक भूमि सौदे को लेकर चर्चा जरूर रही है। जानकारी के अनुसार, अखाड़े की एक भूमि पंचायती आखाड़ा श्री निरंजनी की ग्राम वीरपुर खुर्द तहसील ऋषिकेष जिला देहरादून के खसरा सं79, 80, 81 व 82 रकबा 19000 वर्ग मीटर भूमि मेसर्स आर. के. एण्ड एसोसिएट्स को बिल्डर एग्रीमेन्ट के अन्तर्गत 25 लाख रूपया चेक द्वारा अखाड़े को दिया गया था, का लगभग ₹41 करोड़ 50 लाख में सौदा किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जनपद न्यायाधीश न्यायालय, प्रयागराज में मुकदमा संख्या 236/2026 के तहत न्यायालय से अनुमति प्राप्त करने के लिए राज गिरी और नीलकंठ गिरी की ओर से प्रार्थना पत्र दायर किया गया है।
सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि का सौदा पहले ही किया जा चुका था और अब न्यायालय की अनुमति प्राप्त कर प्रक्रिया को विधिसम्मत बनाने की कार्रवाई की जा रही है। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर अखाड़े के कुछ संतों में असंतोष की स्थिति बनी ही सकती है, हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल पोस्ट में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि के अखाड़ा संभालने जैसी बातें भी लिखी गई हैं, लेकिन अखाड़े की परंपरा के अनुसार पदाधिकारियों का चयन निर्धारित चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से होता है। ऐसे में किसी व्यक्ति के स्वतः अखाड़े का कार्यभार संभालने का दावा तथ्यात्मक रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता।


