प्रयागराज। रविवार को प्रयागराज में श्री उदासीन एवं निर्मल परिषद के पदाधिकारियों ने संयुक्त प्रेसवार्ता उदासीन अखाड़े में आयोजित कर हरिगिरि तथा रवीन्द्र पुरी (निरंजनी अखाड़ा) के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। परिषद ने आरोप लगाया कि दोनों द्वारा सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से भ्रामक और दिग्भ्रमित करने वाला दुष्प्रचार किया जा रहा है, जिससे संत समाज, श्रद्धालुओं तथा सरकार को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रेसवार्ता में परिषद के पदाधिकारियों ने दावा किया कि हरिगिरि समाज से निष्कासित हैं और उनके विरुद्ध विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई चल रही है। गुजरात के जूनागढ़ से इन्हें निष्कासित किया गया है और कई संपत्तियों पर इनके द्वारा कब्जा किया गया है। परिषद का आरोप है कि कुछ स्वयंभू एवं समाज से निष्कासित संतों को प्रलोभन देकर एकजुट किया जा रहा है तथा उनके माध्यम से संत समाज और अखाड़ा व्यवस्था के विरुद्ध निराधार बयानबाजी कराई जा रही है।
परिषद ने आरोप लगाया कि अखाड़ों की संपत्तियों के दुरुपयोग, नियमों के विपरीत निर्माण कार्य और अन्य अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच भारत सरकार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र सरकार द्वारा कराई जानी चाहिए। साथ ही संबंधित मामलों में न्यायालय के माध्यम से विधिक कार्रवाई की भी मांग की गई।
प्रेसवार्ता में यह भी कहा गया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम और पूर्व पदाधिकारियों का दुरुपयोग कर गलत प्रचार किया जा रहा है। परिषद ने स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद की मान्यता प्राप्त 13 परंपरागत अखाड़ों की व्यवस्था संविधान, परंपरा और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है तथा वर्तमान पदाधिकारी उसी व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं।
परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सोशल मीडिया, समाचार माध्यमों और अन्य मंचों के जरिए संत समाज के संबंध में भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रेसवार्ता में उदासीन-निर्मल परिषद ने कहा कि संत समाज की गरिमा, अखाड़ों की परंपराओं और धार्मिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए वह भविष्य में भी समय-समय पर अपना पक्ष मीडिया के माध्यम से रखती रहेगी।


