कारण :
बच्चों को पूरे दिन खेलने-कूदने से थकावट हो जाती है जिसकी वजह से उन्हें बुखार चढ़ जाता है, दूसरे कारणों में ज्यादा ठंड लग जाने की वजह से, ठंडे पानी से नहाने से, जुकाम होने के कारण और छोटे बच्चों के दांत निकलते समय भी बच्चों को बुखार हो जाता है।
लक्षण :
बुखार के रोग में कभी तो बहुत ज्यादा ठंड लगती है या कभी गर्मी की वजह से शरीर में बैचेनी होने लगती है। इस रोग में पूरा शरीर जैसे टूटा हुआ सा लगता है, सिर में दर्द होता है, सांस तेज हो जाती है, भूख नहीं लगती है और आंखें लाल हो जाती हैं।
बुखार का बढ़ना, कब्ज, जी मिचलाना, डकार आना, प्यास, बेहोशी, सुस्ती, थकावट, चक्कर आना और भावुकता इत्यादि बाल ज्वर के लक्षण हैं।
बच्चों के बुखार का विभिन्न औषधियों से उपचार
कालीमिर्च:
लगभग 2 कालीमिर्च और 2 तुलसी के पत्तों को पीसकर शहद के साथ दिन में 3 बार बच्चे को चटाने से बुखार का रोग दूर हो जाता है।
पीपल:
काकड़ासिंगी और पीपल का चूर्ण शहद के साथ 2 चुटकी बच्चे को खिलाने से बुखार दूर हो जाता है।
कुटकी:
लगभग 2 चुटकी कुटकी का चूर्ण शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाने से बुखार में आराम आता है।
हरड़:
1 छोटी हरड़, 2 चुटकी आंवले का चूर्ण, 2 चुटकी हल्दी और नीम की 1 कली को एक साथ मिलाकर काढ़ा बना लें और बच्चे को पिलाएं। इससे बुखार नष्ट हो जाता है।
जायफल:
जायफल को पीसकर माथे, छाती और नाक पर लेप करने से बुखार के रोग में आराम आता है।
पीपल:
पीपल के फल के चूर्ण को बारीक पीसकर शहद के साथ मिलाकर बच्चे को चटाने से बुखार में लाभ होता है।
Vaid Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy Kankhal Hardwar aapdeepak.hdr@gmail.com
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