अंधेरे पर सियासी संग्राम: कांग्रेस पार्षदों ने नगर निगम कार्यालय में जड़ा ताला

हरिद्वार। नगर निगम क्षेत्र में लंबे समय से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और अंधेरे की समस्या को लेकर कांग्रेस पार्षदों का गुस्सा गुरुवार को फूट पड़ा। नाराज पार्षदों ने नगर निगम के स्ट्रीट लाइट अनुभाग कार्यालय पर ताला जड़ दिया और कर्मचारियों को कार्यालय के अंदर बंद कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान निगम परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया।


पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम का स्ट्रीट लाइट विभाग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और यात्री पहुंच रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई इलाकों और वार्डों में अंधेरा पसरा हुआ है। बार-बार शिकायतों के बावजूद खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत नहीं की जा रही है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्षदों और स्ट्रीट लाइट अनुभाग के कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। पार्षदों का कहना था कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी विभागीय कर्मचारी समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं हैं। वहीं कर्मचारियों ने आरोपों को खारिज करते हुए अपनी सीमित संसाधनों और कम स्टाफ की समस्या सामने रखी।


कांग्रेस पार्षद हिमांशु गुप्ता ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनके वार्ड सहित कई क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। जनता लगातार पार्षदों से जवाब मांग रही है, लेकिन निगम कर्मचारी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अपने साथी पार्षदों के साथ समस्या को लेकर कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय अभद्र व्यवहार किया। इससे आक्रोशित होकर पार्षदों ने कर्मचारियों को कार्यालय के भीतर बंद कर मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया।


तालाबंदी और हंगामे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी नगर निगम परिसर पहुंच गए और प्रदर्शन में शामिल हो गए। दूसरी ओर, कर्मचारियों के समर्थन में अन्य निगम कर्मचारी भी एकजुट हो गए और विरोध स्वरूप कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। स्थिति तनावपूर्ण होती देख प्रशासन हरकत में आया।


मामले की जानकारी मिलने पर सहायक नगर आयुक्त श्याम सुंदर तत्काल मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। उनके हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों को कार्यालय से बाहर निकाला गया तथा प्रदर्शन समाप्त कराया गया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना कार्य बहिष्कार समाप्त कर नियमित कार्य शुरू कर दिया।


स्ट्रीट लाइट अनुभाग के कर्मचारियों ने पार्षदों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नगर निगम के 60 वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की देखरेख के लिए कर्मचारियों की संख्या बेहद कम है। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण मरम्मत कार्यों में देरी हो रही है, लेकिन विभाग लगातार समस्याओं के समाधान के लिए प्रयासरत है।


सहायक नगर आयुक्त श्याम सुंदर ने कहा कि आम नागरिक हों या जनप्रतिनिधि, सभी के साथ कर्मचारियों को सौम्य और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी जाए।


इस घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं चारधाम यात्रा के दौरान शहर की मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।

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