फर्जी शंकराचार्य पर गंभीर आरोप, तीन बीघा संपत्ति को सरकार को दान देने की तैयारी से संत समाज में आक्रोश

हरिद्वार/ऋषिकेश। ऋषिकेश स्थित शीशम झाड़ी क्षेत्र की करीब तीन बीघा भूमि को लेकर संत समाज में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संतों के एक वर्ग ने हरिद्वार के एक कथित “फर्जी शंकराचार्य” पर आरोप लगाया है कि वह ब्रह्मलीन संत की संपत्ति को सरकार को दान देने की तैयारी कर रहा है, जबकि उसका उस संपत्ति से कोई वैधानिक अथवा धार्मिक संबंध नहीं है।


मामले को लेकर ऋषिकेश निवासी एक वरिष्ठ संत ने खुलकर विरोध जताते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति स्वयंभू शंकराचार्य है और उसका ब्रह्मलीन संत स्वामी रामानंद गिरि से कोई संबंध नहीं रहा। उन्होंने कहा कि दशनामी संन्यासियों की संपत्ति को किसी भी शंकराचार्य द्वारा सरकार को दान देने का अधिकार नहीं है।


बताया जा रहा है कि विवादित संपत्ति ऋषिकेश के शीशम झाड़ी क्षेत्र में स्थित है और यह “मंदिर श्री भरत जी महाराज, ऋषिकेश” के नाम पर दर्ज बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार उक्त भूमि खेवट संख्या-1, खसरा नंबर-58 में दर्ज है।
संतों के अनुसार इस संपत्ति में पूर्व में स्वामी शांति गिरि महाराज निवास करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में यह स्थान स्वामी रामानंद गिरि को भजन-पूजन एवं निवास हेतु सौंप दिया था। बताया गया कि स्वामी शांति गिरि महाराज की पुत्री कृष्णा देवी पत्नी शीतल दास थीं, लेकिन उन्होंने संपत्ति अपनी पुत्री को न देकर स्वामी रामानंद गिरि को सौंप दी थी।


अब स्वामी रामानंद गिरि के ब्रह्मलीन होने के बाद इस संपत्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक कथित फर्जी शंकराचार्य इस भूमि को सरकार को दान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।


इस घटनाक्रम से संत समाज में भारी नाराजगी व्याप्त है। कई संतों ने इसे सनातन परंपरा और दशनामी अखाड़ों की व्यवस्था में हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और कथित फर्जी शंकराचार्य की “पोल खोलने” के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।


संत समाज ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की विधिवत पड़ताल की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध कार्रवाई को रोका जा सके।

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