जब देश में सैंकड़ों जगद्गुरु और शंकराचार्य, तो समाज में विकृति क्यों!

फर्जी जगद्गुरु और शंकराचार्यों पर उठे सवाल, सनातन समाज से मुखर होने की अपील
हरिद्वार।
देश में कथित रूप से बढ़ते श्फर्जी जगद्गुरु और शंकराचार्यों को लेकर एक बार फिर धार्मिक जगत में बहस छिड़ गई है। कुछ संतों और धर्मप्रेमियों ने आरोप लगाया है कि आजकल विभिन्न स्थानों पर बिना उचित योग्यता और परंपरा के लोगों को धन लेकर मण्डलेश्वर, आचार्य, जगद्गुरु और शंकराचार्य जैसे उच्च धार्मिक पदों पर बैठाया जा रहा है, जिससे सनातन परंपरा की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है।


आज स्थिति ऐसी हो गई है कि हर ईंट के नीचे मेढ़कों की तरह जगद्गुरु और शंकराचार्य पैदा हो रहे हैं। कुछ लोग धन के बल पर बड़े धार्मिक पद हासिल कर लेते हैं, जबकि उनकी योग्यता एक साधारण गुरु बनने तक की भी नहीं होती। ऐसे लोगों को जगद्गुरु बना दिया जाता है, जो परंपरागत मर्यादाओं और गुरु आदेशों का पालन भी नहीं करते।


कुछ कथित धार्मिक नेता मंचों से ऐसे कार्य करते दिखाई देते हैं, जो सनातन परंपराओं के अनुरूप नहीं माने जाते। इसके बावजूद वे चांदी के सिंहासन, छत्र और चंवर जैसे प्रतीकों के साथ स्वयं को उच्च धार्मिक पदों पर स्थापित कर रहे हैं।
बड़ा सवाल यह कि जब देश में बड़ी संख्या में स्वयंभू जगद्गुरु और शंकराचार्य घूम रहे हैं, तो देश में लव जिहाद, धर्मांतरण, गौहत्या और धर्मनगरीयों में मद्य-मांस की बिक्री क्यों हो रही है।


देखा जाय तो सनातन धर्म को जितना खतरा बाहरी चुनौतियों जैसे लव जिहाद, धर्मांतरण या मिशनरियों से बताया जाता है, उतना ही नुकसान कुछ ऐसे लोगों से भी हो रहा है जो फर्जी तरीके से धार्मिक पदों पर लोगों को आसीन की रहे हैं और वे आसीन होकर समाज को भ्रमित कर रहे हैं।

यदि देश में सैंकड़ों जगद्गुरु और शंकराचार्य होने के बाद भी विकृति फैल रही है तो स्पष्ट है की ये अपने कार्य का सही से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। जबकि हजारों अनुयायियों के साथ ये रहते हैं। सनातन समाज इस गंभीर विषय पर जागरूक और मुखर होना होगा। जब तक समाज स्वयं ऐसे मामलों पर सवाल नहीं उठाएगाए तब तक परंपराओं की शुद्धता और धर्म की मर्यादा को बनाए रखना कठिन होगा।

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