कल तक शारदा पीठ का शंकराचार्य होने का दंभ भरने वाला अब हो गया बद्रीनाथ पीठ का शंकराचार्य
हरिद्वार। संतों में आजकल महामण्डलेश्वर, आचार्य, जगद्गुरु शंकराचार्य बनने की होड़ लगी हुई है। इतना ही नहीं एक पीठ का शंकराचार्य होने को दावा करने वाला अब अपनी पीठ की बदल रहा है। ऐसा इतिहास में पहली बार देखने को मिल रहा है। वर्तमान में जो हालत भगवाधारियों के दिखायी दे रहे हैं, उसको देखते हुए मानो से सनातन का बेड़ा गर्क करके ही छोड़ेंगे।
बीते रोज स्वमी चक्रपाणि महाराज को जगद्गुरु बना दिया। अगले दिन फिर से चारद विधि कर दी। इसके साथ ही स्वंय को शारदा पीठ का कथित शंकराचार्य होने का दावा करने वाले को बद्रीनाथ पीठ का शंकराचार्य घोषित कर दिया।
अखाड़े की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्वामी राजराजेश्वराश्रम को बद्रीनाथ पीठ का शंकराचार्य बताया गया। अभी तक वे स्वंय को शारदापीठ का शंकराचार्य बताते थे। वास्तव में शारदा पीठ गुजरात में है और वहां अभी सदानंद सरस्वती शंकराचार्य की गद्दी पर विराजमान है। बावजूद इसके ये स्वंय को पाकिस्तान स्थित शारदा पीठ का शंकराचार्य बताने लगे।
गजब हाल है, जो व्यक्ति पाकिस्तान में गया तक नहीं वह वहां की पीठ का शंकराचार्य हो गया। चलो मान लें कि यह व्यक्ति शारदापीठ का शंकराचार्य बना भी दिया गया हो तो सवाल यह उठता है कि इस पीठ का सृजन किसने किया। आदी गुरु शंकराचार्य ने तो वहां कोई पीठ का निर्माण नहीं किया। अब महाशय बद्रीनाथ पीठ के शंकराचार्य होने लगे।
ऐसा इतिहास में पहली बार सुनने को मिल रहा है कि कोई स्वंय को शंकराचार्य कहता हो और उसने अपनी पीठ बदली हो। बद्रीनाथ पीठ को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। हालांकि बद्रीनाथ नाम की कोई पीठ नहीं है। उत्तराखण्ड मंे जो पीठ है, उसे ज्योतिषपीठ के नाम से जाना जाता है। अब ऐसे में विवादों के बीच बद्रीनाथ पीठ का सृजन करने को क्या कहा जाएगा।
हो सकता है कि स्वंय बद्रीनाथ भगवान गोबर की होली के बीच प्रकट हो गए हों और उन्होंने नए बने जगद्गुरु और उन्हें बनाने वालों की प्रतिभा और तप-त्याग को देखकर बद्रीनाथ पीठ बनाने का आदेश दे दिया हो।
बहरहाल जिस प्रकार से स्वंय को सनातन का धर्मध्वज वाहक होने का दावा करने वाले सनातन का मखौल उड़ा रहे हैं, उसको देखते हुए सनातन को सबसे अधिक क्षति पहुंचाने के ऐसे ही लोग जिम्मेदार हैं। यदि इतने पर भी सनातन प्रेमी लोग ऐसे लोगों के विरूद्ध अपनी आवाज बुलंद नहीं करते हैं तो आने वाले समय में गली-गली जगद्गुरु शंकराचार्य और आचार्य देखने को मिलेें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए।


