हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में अखाड़े के पंचों में से एक श्रीमहंत समेत चार संतों को निष्कासित किए जाने के बाद अखाड़े के भीतर की रार बढ़ती ही जा रही है। जहां अखाड़े की चारों पंगतों में से तीन पंगतों के श्रीमहंतों ने बैठक कर चार संतों को निष्कासित कर दिया था तो वहीं बीते रोज अखाड़े की पश्चिम पंगत के संतों ने बैठक कर पंचों के तीन श्रीमहंतों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर उनकी कार्यवाही को निंदनीय व परम्परा के खिलाफ बताया।
बता दें कि उदासीन बड़ा अखाड़े में पूरब, पश्चिम, उत्तर व दक्षिण चार पंगत होती हैं। इन सभी पंगतों का एक प्रमुख श्रीमहंत होता है। इसके साथ ही चारों पंगतों के श्री महंत व गोला साहब मिलकर पंच परमेश्वर होते हैं। पंचों में से पश्चिम पंगत के श्री महंत व पंचों में शामिल रघुमुनि को शेष पंगतों के श्रीमहंतों ने बहुमत से निष्कासित कर दिया। इसके बाद अब पंचों में तीन पंगतों के श्रीमहंत श्रीमहंत महेश्वर दास, श्रीमहंत दुर्गादास, श्रीमहंत अद्वैतानंद व गोला साहब को मिलाकर चार ही शेष बचे हैं। ऐसे में अब पंचों की संख्या अखाड़े में अपूर्ण हो गई है। बावजूद इसके निष्कासन का फैसला बहुमत से लिया गया निर्णय है।
वहीं दूसरी ओर अखाड़े में पश्चिम पंगत को करीब-करीब खत्म ही कर दिया गया है। कारण की पश्चिम पंगत के श्रीमहंत रघुमुनि थे, साथ ही पंचों में भी शामिल थे, जिन्हें अब निष्कासित कर दिया गया है। इसके साथ ही कोठारी दामोदार दास व सचिव अग्रदास भी पश्चिम पंगत के थे। अब पश्चिम पंगत के केवल मुकामी महंत ही शेष रह गए हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण फैसलों में पश्चिम पंगत का दबदबा समाप्त हो गया है। इसके साथ ही अखाड़े में आपसी रार भी बढ़ने के आसार बन गए हैं। अखाड़ा सूत्रों के मुताबित निष्कासित कोठारी दामोदर दास व श्रीमहंत दुर्गादास के बीच 36 का आकंड़ा पुराना रहा है। कई बार तू-तू, मैं-मैं तक की नौबत भी दोनंों के बीच आ चुकी है।


