हरिद्वार। मां मंशा देवी मंदिर कथित ट्रस्ट में घालमेल का सिलसिला जारी है। लाख कोशिशों के बाद भी प्रशासन इस घालमेल पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहा है। पुख्ता सबूत होने के बाद भी केवल नाराजगी व्यक्त की जा रही है। जिस कारण से कथित ट्रस्टी मां मंशा देवी में आने वाले चढ़ावे पर ऐश कर रहे हैं।
बता दें कि जिस स्थान पर मां मंशा देवी मंदिर का निर्माण हुआ है, वह वन विभाग की भूमि है। जिसको वन विभाग ने मां मंशा देवी मंदिर के नाम पर एलाट किया हुआ है ना कि किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के। वन विभाग भी उक्त भूमि को अपना बता चुका है। साथ ही जिसको ट्रस्ट कहकर प्रचारित व प्रसारित किया जा रहा है, उस नाम का कोई ट्रस्ट अस्तित्व में है ही नहीं। बावजूद इसके कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं है।
इतना ही नहीं वर्ष 2017 में डीएम की अध्यक्षता में हुई कथित ट्रस्ट की बैठक में मंशा देवी पर 19 दुकानें संचालित होने की कथित ट्रस्ट के अध्यक्ष ने स्वाकारोक्ति की थी, जबकि एक दुकान अपनी ही अच्छा से बढ़ाकर 20 कर दी थी। जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की थी।
मजेदार बात यह कि जो दुकानें हैं, उनसे बाकायदा किराया वसूला जा रहा है। उस किराए का उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी कोई लेखा-जोखा नहीं हैं। जमीन वन विभाग की है और किराया कथित ट्रस्ट के ट्रस्टी वसूल रहे हैं। जबकि उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार मां मंशा देवी से होने वाली आय को खर्च करने से पहले डीएम व एसएसपी की अनुमति आवश्यक है। जबकि ऐसा नहीं हो रहा है।


