हर जिले में ड्रग टेस्टिंग लैब और पूरी सप्लाई चेन की जांच की मांग
हरिद्वार। उत्तराखंड में नकली, मिलावटी, मिथ्या लेबलयुक्त और मानक विहीन दवाओं की रोकथाम को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता अरुण भदोरिया, कमल भदोरिया, सुमेधा भदोरिया, चेतन भदोरिया और शाहनवाज मलिक की ओर से दायर याचिका में मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा निदेशक को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि दवा सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं है। नकली या मानक विहीन दवा मरीज के उपचार को प्रभावित करने के साथ उसके स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए संदिग्ध दवा मिलने पर जांच केवल मेडिकल स्टोर तक सीमित न रखकर निर्माता से लेकर सीएंडएफ एजेंट, डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर, स्टॉकिस्ट और रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की जाए।
याचिकाकर्ताओं ने दवा के बैच नंबर, लाइसेंस, इनवॉइस, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज और जीएसटी रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। साथ ही प्रत्येक जिले में ड्रग टेस्टिंग लैब, पर्याप्त संख्या में ड्रग इंस्पेक्टर और नकली दवाओं की शिकायत के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन व्यवस्था स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।
आयोग से पिछले तीन वर्षों में लिए गए ड्रग सैंपलों, उनके परिणामों और नकली दवाओं के मामलों में हुई कार्रवाई की जिलेवार रिपोर्ट सरकार से तलब करने की मांग की गई है।


