पुलिस हिरासत में व्यक्ति की संदिग्ध मौत, मेडिकल के दौरान बिगड़ी तबीयत

हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान नरेश पुत्र चंद्रभान (47) निवासी रावली महदूद, थाना सिडकुल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि आरोपी को फर्जी जमानत के मामले में गिरफ्तार किया गया था।


पुलिस के अनुसार सोमवार को रोशनाबाद स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में सरकार बनाम रोशन लाल मामले की सुनवाई चल रही थी। सुनवाई के दौरान चार व्यक्ति अलग-अलग आरोपियों की जमानत के लिए अदालत में पेश हुए थे। न्यायालय को इनकी गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद इनके दस्तावेजों की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि चारों व्यक्ति पेशेवर जमानती हैं और अलग-अलग मामलों में एक ही समय पर विभिन्न अदालतों में जमानत लेते रहे हैं।


जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने अपने शपथ-पत्र में पहले ली गई जमानतों का उल्लेख नहीं किया था, जिससे अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई। मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने सिडकुल थाना पुलिस को चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।


कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उज्जवल, नरेश, कमलेश और नरेंद्र के खिलाफ धोखाधड़ी से जमानत लेने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। देर रात होने के कारण आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश नहीं किया जा सका, जिसके चलते मंगलवार को पेशी की प्रक्रिया शुरू की गई।


मंगलवार सुबह सिडकुल थाना पुलिस चारों आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए रोशनाबाद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई। इसी दौरान नरेश की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसने पहले पेट दर्द और बाद में सीने में तेज दर्द की शिकायत की। इसके बाद पुलिस उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।


घटना की सूचना मिलने पर मृतक के परिजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए। मामला संवेदनशील होने के कारण न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम कराया।


एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि न्यायालय के निर्देश पर चारों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मेडिकल के दौरान नरेश की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की गाइडलाइन के अनुसार मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा।

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