कानूनी नोटिस के जवाब में साध्वी कंचन सिन्हा ने वीडियो से किया किनारा

वायरल वीडियो को किसी अन्य व्यक्ति की करतूत बताया


हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज, सचिव स्वामी रविंद्र पुरी और जूना अखाड़े के स्वामी हरि गिरि के संबंध में कथित आपत्तिजनक बयानों और वीडियो को लेकर भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब साध्वी कंचन सिन्हा की ओर से उनके अधिवक्ता अशोक कुमार कदवाल, गाजियाबाद के माध्यम से दिया गया है। जवाब में साध्वी ने वायरल वीडियो और उसमें दिए गए कथित बयानों से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।


जानकारी के अनुसार, हरिद्वार निवासी अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने अपने अधिवक्ता कमल भदौरिया और सुमेधा भदौरिया के माध्यम से साध्वी कंचन गिरि को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि वायरल वीडियो के माध्यम से संतों के संबंध में अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।


नोटिस में कथित वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि उसमें स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की थाईलैंड यात्रा और मसाज को लेकर सवाल उठाए गए तथा अन्य संतों के लिए भी कथित रूप से अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया। नोटिस भेजने वाले पक्ष ने वीडियो हटाने, टिप्पणियों का आधार स्पष्ट करने और धार्मिक भावनाएं आहत होने पर लिखित खेद व्यक्त करने की मांग की थी।


‘वीडियो से छेड़छाड़ कर किया गया दुरुपयोग’
साध्वी की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया है कि वायरल वीडियो को उन्होंने स्वयं जारी नहीं किया और न ही इस प्रकार का कोई बयान दिया। जवाब के मुताबिक, किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके वीडियो का कथित रूप से दुरुपयोग कर उसमें छेड़छाड़ करते हुए उसे गलत तरीके से वायरल किया, जिसका उद्देश्य उनकी छवि खराब करना और उन्हें बदनाम करना बताया गया है।


जवाब में साध्वी कंचन सिन्हा ने स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज के प्रति सम्मान और आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उनका किसी भी प्रकार से अपमान नहीं किया है। साथ ही स्वामी रविंद्र पुरी और स्वामी हरि गिरि के प्रति भी सम्मान की बात कही गई है।


कानूनी जवाब में साध्वी ने अपने नाम के रूप में ‘साध्वी कंचन सिन्हा’ लिखकर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें स्वयं को ईश्वर में आस्था रखने वाली साध्वी बताते हुए कथित वीडियो और बयान से पूरी तरह पल्ला झाड़ा गया है। जवाब में यह भी कहा गया है कि वायरल सामग्री किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उनके वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर प्रसारित की गई है।
इस मामले में कानूनी नोटिस और उसके जवाब के बाद अब वायरल वीडियो की वास्तविकता, उसके स्रोत और उसमें कथित छेड़छाड़ के आरोप को लेकर स्थिति संबंधित पक्षों के बीच विवाद का विषय बनी हुई है।

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