सनातन को बदनाम करने के षड्यंत्रों का प्रमाणों के साथ होगा पर्दाफाश: रामदेव

52वें प्राच्यविद्या सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान करेंगे शिरकत, भ्रामक टिप्पणियों पर कानूनी कमेटी बनाने का प्रस्ताव

हरिद्वार। सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा को बदनाम करने के कथित षड्यंत्रों का तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर जवाब दिया जाएगा। पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन में वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य पर गहन मंथन होगा। योग गुरु स्वामी रामदेव ने मंगलवार को कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में पत्रकार वार्ता के दौरान सम्मेलन की रूपरेखा साझा करते हुए यह बात कही।


स्वामी रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म को संकीर्ण दृष्टिकोण से देखने के बजाय उसकी व्यापकता और मूल भावना को समझने की जरूरत है। वेदों में भेदभाव नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश है। सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, सह-अस्तित्व, करुणा और विश्व कल्याण का मार्ग है। भारत की पहचान उसकी ऋषि परंपरा, वेदों, उपनिषदों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। अपनी परंपराओं को जाने बिना उन पर सवाल उठाना और हीनभावना रखना उचित नहीं है।


उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्मशास्त्रों और पुराणों के संदर्भों को बदलकर प्रस्तुत करते हैं, जिससे सनातन धर्म और आराध्य देवी-देवताओं की छवि प्रभावित होती है। भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को गलत संदर्भ में प्रस्तुत करने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर दिखाने जैसी बातों पर उन्होंने आपत्ति जताई। रामदेव ने कहा कि धार्मिक विषयों पर धारणा बनाने से पहले मूल ग्रंथों, संदर्भों और प्रमाणों को समझना चाहिए।

भ्रामक टिप्पणियों पर कानूनी कमेटी का प्रस्ताव
रामदेव ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। शोधपत्रों के प्रस्तुतीकरण के साथ पुस्तक प्रदर्शनी, शास्त्रार्थ और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित होंगी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के संबंध में भ्रामक बातें फैलाने के मामलों के कानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पूर्वाग्रह के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता आज पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है। भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है।

सनातन बोर्ड के स्वरूप पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार
सनातन बोर्ड के गठन के सवाल पर रामदेव ने कहा कि अखाड़ा परिषद और संत समिति जैसे बड़े संगठन पहले से मौजूद हैं। नए बोर्ड का स्वरूप स्वायत्त होगा या अलग, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

बोले- भारत में नहीं होगा बांग्लादेश जैसा तख्तापलट
देश में तख्तापलट की आशंकाओं पर रामदेव ने कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल या मध्य पूर्व के देशों जैसी स्थिति पैदा नहीं होने वाली है। उन्होंने कहा कि भारत के पास मजबूत सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस व्यवस्था, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था है। जिसे सत्ता चाहिए, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्ता में आ सकता है। सड़कों के जरिए सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
उन्होंने नेताओं से अपील की कि वे मेरा दल और मेरा नेता की सोच से ऊपर उठकर राजधर्म और राष्ट्रधर्म को प्राथमिकता दें।

भेदभाव सनातन धर्म के विरुद्धरू स्वामी रामदेव
योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भेद और भेदभाव सनातन धर्म की मूल भावना के विरुद्ध हैं। जो भी व्यक्ति अपने धर्म का निष्ठापूर्वक पालन करता है, वह धर्म के प्रति समर्पित है।

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