हरिद्वार। भगवान शिव की ससुराल कहे जाने वाली कनखल नगरी में मंगलवार को मां बगलामुखी के साधक करौली शंकर महाराज को श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन ने पट्टाभिषेक कर महामण्डलेश्वर बनाया। उल्लासपूर्ण वातावरण और संतों के सानिध्य में पट्टाभिषेक समारोह का आयोजन हुआ, किन्तु एक अखाड़े के महंत ऐसे थे, जो करौली शंकर महाराज के नए अखाड़े के मण्डलेश्वर बनने का समाचार सुनते ही शोक में पड़ गए। महाराज आज भी बड़े परेशान हैं।
सूत्रों की माने तो महंत ने कुछ समय पूर्व एक संत को जगद्गुरु की उपाधि से अलंकृत किया था। जगद्गुरु क्या जगद्गुरु शंकराचार्य बनाया था। जिसको लेकर संत समाज में भी कई प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिली। सूत्र बताते हैं कि महंत ने नए नवेले जगदगुरु को करौली शंकर महाराज को उनके अखाड़े का महामण्डलेश्वर बनाने का जिम्मा सौंपा। जगद्गुरु अपना ध्यान, पूजा-पाठ छोड़कर करौली शंकर महाराज को फंसाने के चक्कर में पड़ गए।
अब करौली शंकर महाराज ठहरे मां बगलामुखी के उपासक तो उनकी बृद्धि को कोई साधारण जगद्गुरु कैसे विचलित कर सकता था। वहीं हुआ, जगद्गुरु को चकमा देकर करौली शंकर महाराज नया उदासीन अखाड़े के महामण्डलेश्वर बन गए। करौली शंकर महाराज के नया उदासीन अखाड़े का महामण्डलेश्वर बनने की खबर जब महंत के कानो में पड़ी तो वे शोक में डूब गए। अपने हाथों से एक बड़े व्यक्ति के निकल जाने के कारण महंत काफी परेशान हैं। वह भी उस स्थिति में जब उन्होंने इसका जिम्मा एक जगद्गुरु को सौंपा था।
अब चर्चा है कि जो जगद्गुरु अपने महंत का एक छोटा सा काम न कर सके वह कैसा जगद्गुरु। खैर चर्चा है कि मां बगलामुखी ने करौली शंकर महाराज पर अपनी बड़ी कृपा की, जो उन्हें चंगुल में फंसने से बचा लिया।


