हरिद्वार। आरटीई के अंतर्गत प्रतिपूर्ति राशि भुगतान के एवज में रिश्वतखोरी में विजिलेंस की ओर से गिरफ्तार प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धन सिंह बिष्ट और बिचौलिया महिला पुष्पांजलि चंडी देवी मंदिर की पूर्व ट्रस्टी रही है। विजिलेंस कोर्ट में पेश करने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
विजिलेंस सेक्टर देहरादून की ट्रैप टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफ थाना सतर्कता देहरादून में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमा दर्ज किया गया था। विजिलेंस ने आरोपित महिला पुष्पांजलि और प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धन सिंह बिष्ट से कड़ी पूछताछ की गई। आरोपितों के दफ्तर और ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
जानकारी के अनुसार पुष्पांजलि 2019 में चंडी देवी मंदिर, हरिद्वार की ट्रस्टी भी रह चुकी है। हालांकि उन्होंने 2019 में इस्तीफा दे दिया था। दिसंबर 2025 में ट्रस्ट को लेकर हरिद्वार के श्यामपुर थाने में दर्ज धोखाधड़ी का मुकदमा भी अब जांच के दायरे में लाया जा रहा है। इससे उसके वित्तीय और सामाजिक नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की रणनीति विजिलेंस द्वारा बनाई जा रही है।
प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान में बिचौलिया बनकर काम कर रही थी। शिकायतकर्ता के गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल, ऋषिकेश में पढ़ रहे छात्रों की प्रतिपूर्ति राशि के बिल पास कराने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की गई थी। बताया जा रहा कि महिला ने पिता के तीन स्कूल भी संचालित हैं।
विजिलेंस अब आरोपित पुष्पांजलि की चल-अचल संपत्ति, बैंक खाते, लाकर और वित्तीय लेनदेन की जांच करने जा रही है। माना जा रहा है कि इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में गहरे बैठे भ्रष्टाचार और नेटवर्क का संकेत दे रहा है। विजिलेंस की जांच आने वाले दिनों में कई और चेहरों से पर्दा उठा सकती है। चर्चा है कि चंडी देवी मंदिर मामले के एंगल से भी टीम जांच की सकती है।


