विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना, पीड़िता को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश
हरिद्वार। नाबालिग पुत्री के साथ दुष्कर्म करने के मामले में अपर जिला जज एवं विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश चंद्रमणि राय ने आरोपी पिता को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़िता को मानसिक, शैक्षिक और शारीरिक क्षति के प्रतिकर के रूप में पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।
गुमशुदगी दर्ज कराने के तीन दिन बाद मिली थी पीड़िता
शासकीय अधिवक्ता भूपेंद्र चौहान ने बताया कि मामला कनखल क्षेत्र का है। 10 सितंबर 2021 को दोपहर करीब ढाई बजे 15 वर्षीय किशोरी बिना बताए घर से चली गई थी। इस संबंध में उसके पिता ने ही थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने तलाश के दौरान घटना के तीन दिन बाद किशोरी को प्रेमनगर आश्रम के बाहर से बरामद किया था।
बरेली से लौटने के बाद दुष्कर्म का आरोप
पुलिस को दिए बयान में किशोरी ने बताया था कि सितंबर 2021 में उसका पिता उसे बरेली स्थित ननिहाल से घर लेकर आया था। उसकी मां और भाई ननिहाल में ही रुक गए थे। किशोरी के आरोपों के अनुसार, घर लाने के बाद पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना से परेशान होकर वह घर छोड़कर चली गई थी। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया था कि पिता ने किसी को घटना के बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी।
पुलिस ने दाखिल की थी चार्जशीट
पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ नाबालिग पुत्री से कई बार दुष्कर्म करने और पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष ने दो गवाहों के बयान कराए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी पिता को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
पीड़िता को पांच लाख रुपये देने के आदेश
विशेष कोर्ट ने पीड़िता को मानसिक, शैक्षिक और शारीरिक क्षति के प्रतिकर के रूप में पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश के अनुपालन के लिए निर्णय की प्रति जिला मजिस्ट्रेट और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

