रानीपुर के बाद अब हरिद्वार सीट पर भी आनंद स्वरूप महाराज की नजर! चुनावी हलचल तेज होने के आसार

रानीपुर से दावेदारी की तैयारी, समीकरण बदले तो हरिद्वार विधानसभा सीट से भी ठोक सकते हैं ताल; दो सीटों पर चुनाव लड़ने की भी चर्चा


हरिद्वार। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सक्रियता की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हरिद्वार की रानीपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटे आनंद स्वरूप महाराज के नाम को अब हरिद्वार विधानसभा सीट से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, उनकी प्राथमिक दावेदारी रानीपुर सीट से ही मानी जा रही है, लेकिन बदलते चुनावी समीकरणों के बीच हरिद्वार सीट से भी चुनाव मैदान में उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


सूत्रों की मानें तो रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में आनंद स्वरूप महाराज काफी समय से सक्रिय हैं और यहां अपनी संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत बताए जा रहे हैं। हालांकि, अब हरिद्वार विधानसभा सीट को लेकर भी उनके मन में चुनाव लड़ने की इच्छा जागृत होने की चर्चा है। ऐसे में आगामी चुनाव में उनकी रणनीति क्या होगी, इस पर राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।


क्या दो सीटों से चुनाव लड़ने की बनेगी रणनीति?
राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना भी सामने आ रही है कि यदि चुनावी परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो आनंद स्वरूप महाराज रानीपुर और हरिद्वार, दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ने का विकल्प भी तलाश सकते हैं। हालांकि, दोनों सीटों से चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि सामने नहीं आई है। फिलहाल इसे संभावित चुनावी रणनीति के रूप में ही देखा जा रहा है।


समीकरण बदले तो दिलचस्प होगा मुकाबला
रानीपुर और हरिद्वार विधानसभा सीटों को लेकर आनंद स्वरूप महाराज की संभावित दावेदारी आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। यदि वह हरिद्वार सीट पर भी गंभीरता से चुनावी तैयारी करते हैं अथवा दो सीटों से मैदान में उतरने का निर्णय लेते हैं, तो दोनों क्षेत्रों में चुनावी चर्चाएं और मुकाबले की तस्वीर दिलचस्प हो सकती है।


फिलहाल आनंद स्वरूप महाराज की प्राथमिकता रानीपुर सीट ही मानी जा रही है। हरिद्वार सीट पर उनकी संभावित दावेदारी और चुनाव लड़ने की रणनीति को लेकर अंतिम स्थिति उनके आधिकारिक रुख और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम से ही स्पष्ट होगी।

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