सिंहस्थ की बैठक में त्रयंबकराज पर बवाल, मंत्री के सामने भड़के हरिगिरि

मंत्री गिरीश महाजन के सामने गरमाया माहौल, बैठक से बाहर जाने लगे हरिगिरी महाराज, नासिक-त्रयंबकेश्वर के बीच भेदभाव का मुद्दा उठा
सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों को लेकर शनिवार को हुई बैठक में भगवान त्रयंबकराज की प्रतिमा की प्रतिकृति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन की मौजूदगी में जूना अखाड़े के प्रमुख महंत हरिगिरी महाराज ने प्रतिकृति पर महादेव का त्रिपुंड नहीं लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। अधिकारियों के साथ तीखी बहस के बाद वह बैठक से बाहर जाने लगे। इससे कुछ देर के लिए बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया।

दरअसल, 31 अक्टूबर को प्रस्तावित ध्वजारोहण समारोह की तैयारियों की समीक्षा के लिए कुंभ मेला प्राधिकरण कार्यालय में जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों और अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में त्रयंबकेश्वर क्षेत्र के बेज द्वीप पर स्थापित होने वाली पंचधातु की 31 फुट ऊंची त्रयंबकराज की प्रतिमा की छोटी प्रतिकृति रखी गई थी। प्रतिकृति देखते ही महंत हरिगिरी महाराज ने आपत्ति दर्ज कराई।

प्रशासन पर बिना सलाह काम करने का आरोप
हरिगिरी महाराज ने आरोप लगाया कि त्रयंबकेश्वर से जुड़े विकास कार्यों में साधु-महंतों से पर्याप्त सलाह नहीं ली जा रही है। उनका कहना था कि त्रयंबकेश्वर को विकास योजनाओं में सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। इसी मुद्दे पर उन्होंने अधिकारियों और मंत्री के सामने नाराजगी जताई और बैठक का बहिष्कार करने की कोशिश की।

साधु-महंतों ने सिंहस्थ की तैयारियों में नासिक और त्रयंबकेश्वर के बीच कथित असमानता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि दोनों स्थानों पर कुंभ से जुड़े आयोजन होने के बावजूद नासिक को अधिक धनराशि दी जा रही है और महत्वपूर्ण बैठकें भी वहीं केंद्रित हैं। बैठक की जानकारी समय पर नहीं मिलने को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

मंत्री ने संभाला मोर्चा
विवाद बढ़ता देख मंत्री गिरीश महाजन ने हस्तक्षेप किया और महंत हरिगिरी महाराज को समझाया। इसके बाद स्थिति शांत हुई। बैठक के बाद महाजन ने कहा कि उन्हें त्रयंबकराज की प्रतिकृति से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन साधु-महंतों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी और इसे मानचित्र में भी स्पष्ट रूप से दर्शाया जाना चाहिए था।

महाजन ने कहा कि सिंहस्थ की योजना में नासिक और त्रयंबकेश्वर के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। दोनों क्षेत्रों के साधु-महंतों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को दूर कर सभी को साथ लेकर सिंहस्थ की योजना तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

सूत्रों की मांने तो आगामी बैठक में कुछ नजारा अलग दिखायी दे सकता है।

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