आचार्य महामंडलेश्वर कैलाश आनंद गिरि की धार्मिक साधना को लेकर दिए गए बयान पर आपत्ति
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश आनंद गिरि की धार्मिक साधना और पूजा-अभिषेक को लेकर साध्वी कंचन गिरि की ओर से सोशल मीडिया पर दिए गए कथित बयानों का मामला न्यायालय पहुंच गया है। हरिद्वार निवासी अधिवक्ता अरुण भदोरिया की ओर से अधिवक्ता कमल भदोरिया के माध्यम से धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। मामले में न्यायालय ने थाना कनखल से आख्या मांगी है, जिसे 21 सितंबर को प्रस्तुत किया जाना है।
प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता अरुण भदोरिया ने बताया कि वह आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश आनंद गिरि की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से प्रभावित हैं। सावन के दौरान उनके द्वारा भगवान शिव का लंबे समय तक अभिषेक और पूजा-अर्चना किए जाने का भी उल्लेख प्रार्थना पत्र में किया गया है। वर्ष 2026 में सावन के दौरान 36 घंटे तक लगातार शिव आराधना किए जाने की बात भी कही गई है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, 8 सितंबर को अरुण भदोरिया ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो देखा, जिसमें साध्वी कंचन गिरि द्वारा शिवलिंग पर कुछ जीव दिखाई देने के संदर्भ में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाश आनंद गिरि की साधना को कथित तौर पर ‘पाखंड’ बताया
गया। वीडियो में निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष एवं सचिव रविंद्र पुरी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
अधिवक्ता का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विभिन्न स्थानों पर कैमरे लगे होने तथा कार्यक्रम के लाइव प्रसारण के कारण वहां होने वाली गतिविधियां श्रद्धालुओं के सामने सार्वजनिक रूप से होती हैं। ऐसे में धार्मिक साधना और पूजा-अर्चना को पाखंड बताने वाला बयान श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित करने वाला है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि कथित बयान के बाद सामान्य श्रद्धालुओं के मन में आचार्य महामंडलेश्वर की पूजा-पद्धति और साधना को लेकर भ्रम एवं जिज्ञासा उत्पन्न हो सकती है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि साध्वी कंचन गिरि के बयान किसी तथ्य या सद्भावनापूर्ण आलोचना पर आधारित न होकर एक प्रतिष्ठित धार्मिक संत की धार्मिक साधना, पूजा-पद्धति और आस्था पर सार्वजनिक रूप से लांछन लगाने वाले हैं।
अब न्यायालय के निर्देश पर थाना कनखल मामले में अपनी आख्या प्रस्तुत करेगा।


