झुग्गी से पक्के आशियाने तक पहुंचा 13 परिवारों का सफर

निस्वार्थ कदम की पहल से बदली जिंदगी, पीएम आवास योजना के तहत मिले फ्लैट
बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के रोजगार की जिम्मेदारी भी उठाएगी संस्था


हरिद्वार। वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में जिंदगी गुजार रहे 13 अति-गरीब परिवारों के लिए रविवार का दिन नई उम्मीद लेकर आया। सामाजिक संस्था ‘निस्वार्थ कदम’ के प्रयासों से बैरागी कैंप के बंजारी वाला क्षेत्र में रहने वाले इन परिवारों को अपना पक्का आशियाना मिल गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आनेकी-हेतमपुर में बने फ्लैटों की चाबियां परिवारों को सौंपी गईं तो कई लाभार्थियों की आंखें खुशी से नम हो गईं।

प्रेस वार्ता में संस्था के वरिष्ठ सदस्य रोहित वर्मा ने बताया कि बैरागी कैंप क्षेत्र में 50 से अधिक परिवार लंबे समय से बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं। संस्था का लक्ष्य इन सभी जरूरतमंद परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने में सहयोग करना है। इसी क्रम में पहले चरण में 13 परिवारों को आवास दिलाया गया है और बाकी परिवारों को भी चिन्हित कर अगले चरण में आवास उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आनेकी-हेतमपुर में उपलब्ध कराए गए फ्लैट 1 बीएच हैं, जिनमें कमरा, रसोई, शौचालय-बाथरूम और बालकनी की सुविधा है। संस्था के प्रयासों से इन परिवारों के लिए बिजली और पानी की व्यवस्था के साथ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन की सुविधा भी सुनिश्चित कराई गई है। आवास मिलने के बाद लाभार्थियों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने पूरी जिंदगी झोपड़ी में गुजार दी और कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपना पक्का घर मिल पाएगा। उनके लिए यह केवल मकान नहीं, बल्कि बेहतर और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है।

बच्चों की शिक्षा और महिलाओं के रोजगार पर भी जोर
संस्था ने इन 13 परिवारों के बच्चों की शिक्षा तथा महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की जिम्मेदारी भी उठाने की घोषणा की है। संस्था का कहना है कि केवल आवास उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवारों को शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़कर उनके जीवन में स्थायी बदलाव लाना जरूरी है।

दिहाड़ी मजदूरी और छोटे कामों से चलता था परिवारों का गुजारा
बंजारी वाला क्षेत्र में रहने वाले इन परिवारों में कई लोग दिहाड़ी मजदूरी, रिक्शा चलाने और गुब्बारे बेचने जैसे छोटे-मोटे काम कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। जमीन और स्थायी आवास नहीं होने के कारण उन्हें लंबे समय तक झुग्गियों में ही रहना पड़ा। शासन के सर्वे में इन परिवारों को अति-गरीब श्रेणी में चिन्हित किया गया था। संस्था पिछले कई वर्षों से इनके लिए स्थायी आवास की संभावनाओं पर काम कर रही थी।

सेवा के अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय है निस्वार्थ कदम
संस्था के अनुसार, ‘निस्वार्थ कदम’ लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम कर रही है। गरीब बच्चों के लिए ‘शिक्षा का कदम’ नाम से निःशुल्क पाठशाला संचालित की जा रही है, जहां बच्चों को किताबें, कॉपियां और ड्रेस उपलब्ध कराई जाती हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के घुड़दौर गांव में ‘मनु हेल्थ केयर’ के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराने का दावा संस्था ने किया है। इसके अलावा समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किए जाते हैं।


कोरोना काल में शुरू की गई ‘कोई भूखा न सोए’ मुहिम के तहत धार्मिक स्थलों और रेलवे स्टेशन सहित विभिन्न स्थानों पर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। संस्था ने गंगा घाटों पर स्वच्छता अभियानों और पौधरोपण के साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित किए हैं।


रविवार को आयोजित कार्यक्रम में जब लाभार्थियों के हाथों में उनके नए घर की चाबी पहुंची तो वर्षों की मुश्किलों के बीच उनके चेहरों पर सुकून और खुशी साफ नजर आई। 13 परिवारों के लिए यह पल महज एक आवास मिलने का नहीं, बल्कि स्थायी छत, सम्मान और नई जिंदगी की शुरुआत का अवसर बन गया।

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