कर्मचारी-शिक्षकों के मुख्यमंत्री आवास घेराव को पेंशनर्स का समर्थन, जीपीडब्ल्यूओ ने सरकार की पेंशन नीति पर उठाए सवाल
हरिद्वार। पुरानी पेंशन बहाली की दशकों पुरानी मांग को लेकर रविवार को देहरादून में कर्मचारी और शिक्षक बड़ा प्रदर्शन करेंगे। प्रस्तावित एक दिवसीय धरने के बाद मुख्यमंत्री आवास घेराव के कार्यक्रम को अब पुरानी पेंशन का लाभ ले रहे पेंशनर्स ने भी समर्थन दे दिया है। गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (जीपीडब्ल्यूओ) ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का ऐलान करते हुए हरिद्वार से दर्जनों पेंशनर्स के राजधानी कूच की तैयारी की है।
जीपीडब्ल्यूओ के प्रांतीय आह्वान पर हरिद्वार जिले के पेंशनर्स अपने वाहनों से देहरादून पहुंचेंगे। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की मांग को मजबूती से उठाना और कर्मचारियों की पेंशन संबंधी चिंताओं को सरकार तक पहुंचाना है।
जीपीडब्ल्यूओ के महामंत्री जेपी चाहर ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारी की लंबी सेवा के दौरान अर्जित अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, वर्ष 2004 से एनपीएस लागू किए जाने के बाद पुरानी पेंशन व्यवस्था बंद कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वित्त विधेयक 2025 की आड़ में मौजूदा पुरानी पेंशन व्यवस्था को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की कथित पेंशन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।
संगठन के जिलाध्यक्ष बीपी चौहान ने बताया कि हरिद्वार से जाने वाले पेंशनर्स अपने निजी वाहनों से प्रेमनगर अंडरपास पर एकत्र होंगे। इसके बाद श्पुरानी पेंशन बहाल करोश् के नारों के साथ देहरादून के लिए कूच किया जाएगा। शनिवार को आंदोलन की तैयारियों को लेकर बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की गई। इस दौरान बीपी चौहान, वीके गुप्ता, आरके जोशी, रमेश चंद्र पंत, सुखवंश सिंह, रामसरीख, अतर सिंह, विनोद शर्मा और भूपेंद्र सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प दोहराया। पेंशनर्स के आंदोलन में शामिल होने से पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन को और व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है।


