“अखाड़े के पतन का कारण नारी बनेगी!” कंचन भवानी के बयान से मचा हड़कंप

शिवलिंग पर केंचुए छोड़ने के मामले में साध्वी कंचन भवानी का बड़ा हमला, कैलाशानंद पर कार्रवाई की मा


हरिद्वार। श्रावण मास में शिव आराधना के दौरान शिवलिंग पर कथित रूप से केंचुए छोड़कर उन्हें सपोला बताए जाने के मामले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में दुर्गाचार्य साध्वी कंचन भवानी ने जूना अखाड़े के संरक्षक हरि गिरि महाराज से कैलाशानंद जी पर कार्रवाई की मांग उठाई है। साध्वी ने वीडियो संदेश जारी कर अखाड़े के संतों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।


साध्वी कंचन भवानी ने कहा कि उज्जैन में चिता से मांस खाने वाले अघोरी साध्वी के मामले में हरि गिरि महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, लेकिन शिवलिंग पर केंचुए छोड़कर उन्हें सपोला बताने के मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में आखिर मौन क्यों धारण किया गया है?


उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक परंपरा या आस्था से जुड़े विषय में गलत तरीके से प्रस्तुतिकरण किया जाता है तो अखाड़ों के जिम्मेदार संतों को उस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने जूना अखाड़े में चल रही गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अखाड़े के भीतर क्या-क्या चल रहा है, इस पर भी जिम्मेदार संतों को सामने आकर बोलना चाहिए।


साध्वी ने आरोप लगाया कि एक मामले में कड़ी प्रतिक्रिया और दूसरे मामले में चुप्पी से सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। उन्होंने संबंधित संत के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।


अपने वीडियो संदेश में साध्वी कंचन भवानी ने अखाड़ों के भविष्य को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार रावण के पतन का कारण एक नारी बनी और महाभारत के युद्ध का कारण भी एक नारी बनी, उसी प्रकार अखाड़े के पतन का कारण भी नारी बन सकती है।

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