हरिद्वार में संपत्ति के लिए पहले भी हो चुकी हैं कई संतों की हुई हत्या, जानिए कब-कब मारे गए साधु

हरिद्वार। उत्तराखंड में पहले भी कई संतों की संपत्ति के लिए हत्या हो चुकी है। ऐसे ही कुछ पुराने मामले पर एक नजर डालते हैं।
25 अक्टूबर 1991 को रामायण सत्संग भवन के संत राघवाचार्य आश्रम से निकलकर टहल रहे थे। तभी स्कूटर सवार लोगों ने उन्हें घेरकर पहले गोली मारी, फिर चाकूओं से गोद दिया था। इस मामले में 21 दिन बाद एक की गिरफ्तारी की गई थी।


09 दिसम्बर 1993 को रामायण सत्संग भवन के ही स्वामी व संत राघवाचार्य आश्रम के साथी रंगाचार्य की ज्वालापुर में हत्या कर दी गई। अब सत्संग भवन में सरकारी पहरा है और उस पर रिसीवर तैनात है।
सुखी नदी स्थित मोक्षधाम की करोड़ों की संपत्तिरू 1 फरवरी 2000 को ट्रस्ट के सदस्य गिरिश चंद अपने साथी रमेश के साथ अदालत जा रहे थे। पीछे से एक जीप ने टक्कर मारी, जिसमें रमेश मारे गये। पुलिस ने स्वामी नागेन्द्र ब्रह्मचारी को सूत्रधार मानते हुए जेल भेज दिया था।
बेशकीमती कमलदास की कुटिया पर भी कई लोगों की नजर रही। लोगों के बीच झगडे़ भी हुए, लेकिन वो संपत्ति आज तक किसी को भी नहीं मिल पाई। आज भी कमलदास की कुटिया पर पुलिस का पहरा है।


चेतनदास कुटिया में तो अमेरिकी साध्वी प्रेमानंद की दिसंबर 2000 में लूटपाट कर हत्या कर दी गई। कुछ स्थानीय लोग पकड़े गये गए थे। आज भी मामला चल रहा है।
वहीं, 5 अप्रैल 2001 को बाबा सुरेन्द्र बंगाली की हत्या की गई थी।
इसके अलावा 16 जून 2001 को हरकी पैड़ी के सामने टापू में बाबा विष्णु गिरी समेत चार साधुओं की हत्या हुई थी।
26 जून 2001 को ही एक अन्य बाबा ब्रह्मानंद की हत्या हुई थी। इसी साल पानप देव कुटिया के बाबा ब्रह्मदास को दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या की गई थी।
17 अगस्त 2002 बाबा हरियानंद व उनके चेले की हत्या। एक अन्य संत नरेन्द्र दास की भी हत्या की गई थी। पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।


06 अगस्त 2003 को संगमपुरी आश्रम के प्रख्यात संत प्रेमानंद उर्फ भोले बाबा गायब हुए थे। सात सिंतबर 2003 को पुलिस ने हत्या का खुलासा किया। आरोपी गोपाल शर्मा पकड़ा गया। अब आश्रम सील है।
28 दिसम्बर 2004 को संत योगानंद की हत्या। हत्यारों का पता आज तक नहीं चला।
15 मई 2006 को पीली कोठी के स्वामी अमृतानंद की हत्या। संपत्ति पर सरकारी कब्जा।
25 नवंबर 2006 को सुबह इंडिया टेम्पल के बाल स्वामी की गोली मारकर हत्या। तीन लोग गिरफ्तार हुए।
08 फरवरी 2008 को निरंजनी अखाड़े के 7 साधुओं को जहर दिया गया था। सभी की जान बच गई थी। लेकिन आज तक कोई आरोपी पकड़ा नहीं गया।


14 अप्रैल 2012 निर्वाणी अखाड़े के महंत सुधीर गिरि की हत्या। इसमें स्थानीय व्यक्ति और कुछ भू माफिया गिरफ्तार हुए थे, जो अब जेल से बाहर है।
26 जून 2012 तिहरे हत्याकांड ने न सिर्फ हरिद्वार पुलिस-प्रशासन, बल्कि शासन और सरकार तक को हिला दिया था। दरअसल, हरिद्वार के लक्सर में हनुमान मंदिर के अंदर 26 जून की देर रात तीन संतों की हत्या की गई ती। पुलिस इस मामले को भी सम्पति विवाद बता रही थी। इसमें दो गिरफ्तार हुई थी।


साल 2018 में पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा के कोठारी महंत मोहन दास गायब हुए थे, जिनका आजतक कुछ पता नहीं चल पाया। पुलिस आज तक उनकी तलाश कर रही है। कोठारी के पास अखाड़े की पूरी संपत्ति का लेखा-जोखा मौजूद रहता था।
अक्टूबर साल 2024 में कनखल के ही श्रद्धा भक्ति आश्रम के संत के साथ कुछ लोगों ने पहले नजदीकियां बढ़ाई और उसके बाद उनकी हत्या कर दी। पुलिस की जांच में हत्या की वजह से करोड़ों रुपए संपत्ति ही बताया गया। पुलिस को 17 अक्टूबर को ही महंत के लापता होने की सूचना मिली थी। जब मामले की जांच की गई तो हत्या की बात सामने आई। पुलिस ने इस मामले में यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली के कई लोगों को गिरफ्तार किया था।


अब 21 जुलाई 2026 को पथरी थाना क्षेत्र के पथरेश्वर महादेव मंदिर में दो साधुओं के गड्ढ़े में शव बरामद किए गए। एक साधु की पहवान सेवा गिरि के रूप में हुई। इस मामले में मंदिर के पुजारी व अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
जिस प्रकार से संतों की हत्याएं हो रही हैं। वह चिंता का विषय है। अधिकांश हत्याओं की वजह सम्पत्ति ही रही। संतों के ठाट-बाट और विलासितापूर्ण जीवन भी इन हत्याओं का एक बड़ा कारण कहा जा सकता है।

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