अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी नाम के ऑडियो-वीडियो प्रसारण मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया और राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान राठौर की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में आरती गौड़ की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रही है, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की जाए। अदालत ने दलीलों पर विचार करते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी।
मामले से जुड़े दो अन्य मुकदमों को हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है, जबकि आरती गौड़ और भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की शिकायतों से जुड़े मामलों में जांच जारी है। यह विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक कथित वीआईपी के नाम पर आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन सामग्रियों से उनकी छवि धूमिल हुई है।
इससे पूर्व हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया के माध्यम से किसी गंभीर अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर मामला है। अदालत ने कहा कि यदि किसी के पास कोई ठोस साक्ष्य है तो उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी की छवि खराब करने या राजनीतिक उद्देश्य से किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने जांच एजेंसियों को मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।


