हरिद्वार। स्वामी विनोद महाराज शांभवी पीठाधीश्वर एवं काली सेना प्रमुख स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान देकर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड की जनता वास्तव में राज्य के सर्वांगीण विकास, सनातन संस्कृति के संरक्षण और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की इच्छुक है, तो उसे उनके जैसे धर्म और राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने पर विचार करना चाहिए।
बातचीत करते हुए स्वामी विनोद महाराज ने कहा कि आज राजनीति सेवा का माध्यम कम और स्वार्थ सिद्धि का साधन अधिक बनती जा रही है। ऐसे समय में समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो धर्म, संस्कृति, राष्ट्रहित और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे सके। उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन सनातन धर्म, राष्ट्र सेवा और समाज जागरण के लिए समर्पित रहा है और यदि जनता उन्हें अवसर देती है तो वह उत्तराखंड को देश का आदर्श राज्य बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। उत्तराखण्ड को शराब, कबाव व मुस्लिम मुक्त बनाने का कार्य करेंगे और देवभूमि की गरिमा को पुनः स्थापित करने का कार्य किया जाएगा।
स्वामी विनोद महाराज ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यहां की पहचान केवल पर्यटन या प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश ऋषियों, मुनियों और सनातन परंपराओं की भूमि है। उन्होंने कहा कि राज्य की नीतियों में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को केंद्र में रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक शासन व्यवस्था में नैतिकता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का समावेश नहीं होगा, तब तक समाज की अनेक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों के दौरान जनता से बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद अधिकांश नेता उन वादों को भूल जाते हैं। इससे जनता का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसेवा की भावना को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
स्वामी विनोद महाराज ने कहा कि यदि स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज को प्रदेश की बागडोर संभालने का अवसर मिला तो युवाओं के रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन रोकने और धार्मिक पर्यटन के विकास को प्राथमिकता मिलेगी। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सही नेतृत्व और दूरदर्शी नीतियों के अभाव में उनका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इतिहास में कई ऐसे उदाहरण हैं जब संतों और आध्यात्मिक नेताओं ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसका प्रमुख उदाहरण यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं।
स्वामी विनोद महाराज ने कहाकि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल विशेष का विरोध या समर्थन करना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के विकास और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए ऐसी उनकी धारणा हैै।


