मुख्यमंत्री के पत्र पर विवाद, हिंदू लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने भेजा कानूनी नोटिस

नई दिल्ली/हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक पत्र में ज्योतिर्मठ/ज्योतिष पीठ शंकराचार्य का उल्लेख किए जाने पर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में हिंदू लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री को कानूनी नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

फोरम की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एम. पी. सिंह ने जारी नोटिस में कहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र संख्या 1274 दिनांक 28 मई 2026 में ज्योतिर्मठ/ज्योतिष पीठ शंकराचार्य का उल्लेख किया गया है, जबकि इस पद, उत्तराधिकार और उससे जुड़े अधिकारों को लेकर विवाद अभी भी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में लंबित है।

फोरम का दावा है कि संबंधित मामले सिविल अपील संख्या 3010/2020, 3011/2020 तथा कंटेम्प्ट पिटीशन (सिविल) संख्या 65/2024 के रूप में न्यायालय में विचाराधीन हैं। नोटिस में कहा गया है कि जब तक न्यायालय अंतिम निर्णय नहीं देता, तब तक किसी भी विवादित दावे को सरकारी मान्यता देना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

सरकार से की गई प्रमुख मांगें

फोरम ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि 28 मई 2026 को जारी पत्र संख्या 1274 को तत्काल वापस लिया जाए।
स्पष्ट किया जाए कि सरकार किसी भी विवादित धार्मिक दावे को आधिकारिक मान्यता नहीं दे रही है।
पत्र जारी होने की परिस्थितियों की जांच कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय तक किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक रूप से ज्योतिर्मठ शंकराचार्य संबोधित न किया जाए।
15 दिनों के भीतर लिखित जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

कुंभ मेला 2027 का भी उल्लेख
नोटिस में कहा गया है कि हरिद्वार कुंभ मेला 2027 से जुड़े प्रोटोकॉल, निमंत्रण पत्र, प्रचार सामग्री, भूमि आवंटन, कैंप आवंटन अथवा अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में ज्योतिर्मठ शंकराचार्य का उपयोग न्यायालय के आदेशों के अनुरूप होना चाहिए।

फोरम ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत सुप्रीम कोर्ट और अन्य सक्षम मंचों पर आगे की कार्रवाई करेगा।

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