हरिद्वार जिले में बनाई जा रही उत्तराखंड की सबसे ऊंची मस्जिद की मीनारों को हटाने का काम शुरू

हरिद्वार। मोक्षदायिनी कहे जाने वाली सप्तपुरियों में से एक हरिद्वार के सुल्तानपुर में कथित रूप से बनाई जा रही उत्तराखंड की सबसे ऊंची मस्जिद की मीनारों को गिराने का काम शनिवार को शुरू हो गया है।


उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 में उत्तराखंड की सबसे बड़ी मस्जिद के निर्माण और ऊंची मीनारों (250 फिट) को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और न ही इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन अथवा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी। सोशल मीडिया में प्रकरण चर्चित होने पर डीएम हरिद्वार ने इसके निर्माण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था,जिसके बाद उक्त मस्जिद के निर्माण कार्य को रोक दिया गया था।


डीएम मयूर दीक्षित ने बताया कि पूर्व में मस्जिद प्रबंधकों को नोटिस दिया गया था, जिसका ना तो प्रबंधन ने कोई जवाब दिया और न ही उनके द्वारा अवैध निर्माण हटाया गया। आज एसडीएम के नेतृत्व में पुनः प्रशासनिक टीम ने वहां जाकर प्रबंधकों को चेतावनी दी कि अवैध निर्माण को नहीं हटाने की दशा में परिसर को सील कर दिया जाएगा। जिसके बाद प्रबंधकों ने आपत्ति जनक मीनार को स्वयं हटाने का काम शुरू करवा दिया है।


प्रशासन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का 2009 और 2016 का निर्देश है कि कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी की अनुमति के नहीं बनाई जा सकती। इसके पीछे तर्क यही था कि एक तो धार्मिक संरचना, सरकारी भूमि पर न बने और इसके निर्माण में सुरक्षा के हर पहलू का ध्यान रखा जाए। लेकिन इस मस्जिद के निर्माण मानकों को लेकर गाइड लाइन की चिंता नहीं की गई। न नक्शा पास करवाया गया, न फायर सेफ्टी सहित अन्य किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया।

विदित हो कि उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है, जिसका आंकड़ा उत्तराखंड सरकार के पास भी है। इनमें सबसे ज्यादा मस्जिदें सनातन गंगा नगरी हरिद्वार जिले में है, जिनकी संख्या 322 बताई गई है।
देहरादून जिले में 155, उधम सिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें है।


गौर करने वाली बात ये कि इनमें से अधिकांश मामलों में निर्माण संबंधी अनुमति नहीं ली गयी। कारण ये है कि प्रशासनिक अनुमति प्राप्त करने के लिए उन्हें भूमि, संस्था पंजीकरण, आय व्यय का ब्यौरा और अन्य दस्तावेज दिखाने पड़ते है जोकि बहुत से मस्जिद प्रबंधकों के पास नहीं होते। कई इमारतें ऐसी है जोकि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे करके बनाई गई है और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत करवा दिया गया।

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