स्वामी चैतन्य सरस्वती ने रेणुका के आरोपों को बताया निराधार, बोले असली कालनेमि भी ऐसे ही लोग

हरिद्वार। हरिपुर कलां स्थित राष्ट्र भक्ति आश्रम को लेकर चल रहे विवाद के बाद आज स्वामी चैतन्य सरस्वती ने मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा। स्वामी चैतन्य ने साध्वी रेणुका की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए रेणुका के आरोपों को षडयंत्र बताया।


शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी चैतन्य सरस्वती ने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से उन्होंने राष्ट्र भक्ति आश्रम की स्थापना की थी, लेकिन अब इसे हड़पने की साजिश की जा रही है।


स्वामी चैतन्य सरस्वती ने आरोप लगाया कि साध्वी रेणुका ने निरंजन नामक व्यक्ति के साथ मिलकर न केवल मारपीट की, बल्कि आश्रम पर कब्जा करने का प्रयास भी किया। उन्होंने कहा कि यह कृत्य संत परंपरा को बदनाम करने वाला है। यह लोग साधु के भेष में असली कालनेमि हैं। सरकार को इनकी जांच कर ऐसे लोगों को जेल भेजने का काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत समाज में ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि किसी साध्वी ने किसी संत पर एससी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया हो। संत की कोई जाति नहीं होती, फिर भी जात का ये हथियार के रूप में इस्तेलाम कर रहे हैं। वह भी भगवा चोला धारण करने के बाद, यह संत परंपरा के लिए बेहद शर्मनाक है।


स्वामी चैतन्य सरस्वती ने आरोप लगाया कि साध्वी रेणुका और उनके सहयोगी इससे पहले भी गंगोत्री, नगीना सहित कई अन्य क्षेत्रों में इसी तरह एससी एक्ट का दुरुपयोग कर आश्रमों पर कब्जा करने का प्रयास कर चुके हैं।
साध्वी रेणुका द्वारा विवाद की सूत्रपात वर्तमान में आईएएस अनुराधा पाल को बताए जाने पर स्वामी चैतन्य सरस्व्ती ने कहाकि अनुराधा पाल के यहां बचपन में लगभग 5 वर्ष की उम्र में आना जाना था, लेकिन उनका इस पूरे प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है। कहा कि आश्रम उनका है। इस मामले में एक षड्यंत्र के तहत एक बड़े अधिकारी का नाम लेकर मामले को तूल दिया जा रहा है।
पत्रकार वार्ता के दौरान मौजूद साध्वी प्राची ने भी साध्वी रेणुका के कृत्यों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि एक महिला साध्वी को इस प्रकार के कार्य शोभा नहीं देते। साध्वी प्राची ने आरोप लगाया कि साध्वी रेणुका ने संत परंपरा के विरुद्ध कार्य किया है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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