चमोली। प्रयागराज में मौनी अमावस्या गंगा स्नान विवाद के बाद यूपी सरकार का उन्हें नोटिस भेजकर शंकराचार्य सिद्ध करने के विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। इसके बाद प्रयागराज से बिना गंगा स्नान किए काशी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इसी बीच बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने को लेकर बड़ा धार्मिक संकेत सामने आया है।

प्रयागराज में हुए घटनाक्रम के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद गहराया था। इस बीच काशी पहुंचकर उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने के लिए 40 दिन का अल्टीमेटम देते हुए अपनी मांगें रखीं। विवाद के बीच अब उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। श्री बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की शीर्ष पंचायत श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक धार्मिक अनुष्ठान के लिए न्योता भेजा है। पंचायत अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी ने कहा कि हमारी ओर से भेजे गए इस न्योते में भगवान श्री बदरी विशाल के तेल कलश यानी गाडू घड़ा के ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम प्रस्थान में शामिल होने का आग्रह किया गया है। पुजारी समुदाय की ओर से यह न्यौता शंकराचार्य को भेजा गया है।
धार्मिक जानकारों के मुताबिक, गाडू घड़ा यात्रा बदरीनाथ धाम की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। ऐसे में शंकराचार्य के रूप में न्योता दिया जाना, उनके पद को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। गौरतलब है कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान ने देश की चार दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की थी। उत्तर दिशा की पीठ ज्योतिषपीठ, श्री बदरीनाथ धाम है। यहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज शंकराचार्य के रूप में विराजमान हैं। अब देखना होगा कि योगी सरकार 40 दिन के अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाती है और उत्तराखंड से मिले इस धार्मिक संकेत का राजनीतिक और सामाजिक असर किस दिशा में जाता है। गौरतलब है कि इस साल बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने जा रहे है।


