हरिद्वार। शांभवी ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीराम कथा का रविवार को विधिवत विश्राम हो गया। शंकरपुर कसेसर बलिया में आयोजित में कथा व्यास मृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी महाराज ने प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धर्म, मर्यादा, त्याग, सेवा और आदर्श जीवन के महत्व को समझाया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन रहे।
स्वामी प्रणव पुरी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा केवल श्रवण करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, धैर्य और त्याग का प्रतीक है। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार और मानवीय मूल्यों को मजबूत कर सकता है। रामचरितमानस का प्रत्येक प्रसंग मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने तथा अपने कर्तव्यों का पालन करने की सीख देता है।
कथा से मिलता है संस्कार और सदाचार का संदेश
कथा आयोजक एवं पावन सानिध्य प्रदान करने वाले स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में धर्म के प्रति आस्था बढ़ती है और नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं तथा जीवन मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारना ही कथा श्रवण की सार्थकता है।
कथा के विश्राम अवसर पर श्रद्धालुओं ने धार्मिक वातावरण में प्रभु श्रीराम का स्मरण किया। आयोजन से जुड़े लोगों ने कथा के सफल संचालन में सहयोग देने वाले संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कथा संयोजक ज्ञानेश्वर मिश्र, गुड्डू बाबा और आचार्य आदर्श तिवारी ने कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से श्रीराम कथा का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने आयोजन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 19 अक्टूबर को प्रातः से सायं तक भंडारे का आयोजन होगा।

