प्रश्न: MAAsterG, क्या AI से हमें डरना चाहिए?
उत्तर:
AI, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता)। पहले समझना है इंटेलिजेंस क्या है। इंटेलिजेंस यानी ‘मन’, जिसे बुद्धि कहते हैं। मन में विचार स्टोर होते हैं। जिस इंटेलिजेंस ने इंसान को बनाया, उसे हम परमात्मा या सुपर इंटेलिजेंस (SI)—परम बुद्धिमत्ता— कहते हैं जिसने रियल इंटेलिजेंस (RI)—असली बुद्धिमत्ता—बनाई। यह रियल है, इसे हम शरीर कहते हैं, और इसमें जो मन है, वह स्टोर करता है।
एक बच्चा जब जन्म लेता है, वह अंदर RI लेकर आता है क्यूंकि वह परमात्मा से जुड़ा हुआ होता है। उसके मन में कोई शब्द नहीं होता। धीरे-धीरे जैसे वह बड़ा होता है, शब्द अंदर ग्रहण करता है और वे अंदर स्टोर होते जाते हैं। यह आर्टिफिशियल है और इसके ऊपर सुपर इंटेलिजेंस कमांड कर रही है। खेल ऐसा है—रियल आत्मा पहले भी थी, बाद में भी रहेगी।
AI सबसे निचले स्तर पर है, RI मध्य में है और सुपर इंटेलिजेंस सबसे ऊपर है। सुपर सदा था, है और रहेगा, रियल आएगा और जाएगा और आर्टिफिशियल अस्थायी है। इसलिए AI, रियल इंटेलिजेंस और सुपर इंटेलिजेंस का स्थान नहीं ले सकता। बाप, बाप ही रहेगा, बॉस, बॉस ही रहेगा।
गलत कुछ नहीं है, लेकिन जब अहंकार आ जाता है तो सब गड़बड़ हो जाता है। यह छोटा संकट नहीं, महासंकट है। अगर सही इस्तेमाल किया, रियल इंटेलिजेंस और सुपर इंटेलिजेंस को समझा, तो AI की मौज लेंगे। आध्यात्मिकता वही है—स्पिरिट को समझना, जिससे मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार को जान जाओगे। फिर आप AI का सही उपयोग कर पाओगे। लेकिन अगर आर्टिफिशियल को आगे कर दिया और रियल को कब्जा करा दिया, तो सर्वनाश हो जाएगा। इसलिए पहले रियल और सुपर इंटेलिजेंस को जानो, AI को बाद में इस्तेमाल करो।
भारत और ‘इनर इंटेलिजेंस’
प्रश्न: भारत को कभी विश्व गुरु कहा जाता था। क्या भारत के पास वह ‘इनर (आंतरिक) इंटेलिजेंस’ का ज्ञान है जो दुनिया को संतुलन दे सकता है?
MAAsterG:
भारत के पास ही अंदरूनी बुद्धिमत्ता है। जब कोई रियल बुद्धिमत्ता पर पहुँच जाता है, वह परम चेतना तक पहुँच जाता है। पर भारत की बदकिस्मती है कि वह अपनी ही खदान को भूल गया और नकली बुद्धिमत्ता यानी AI के पीछे पड़ गया है।
आंतरिक रूप से भारत पहले जितना खुशहाल था, अब नहीं है, क्योंकि वह पश्चिमी सभ्यता जैसा बनना चाहता है। हमारे पास आंतरिक संपदा है, जिसे बुद्ध, महावीर, जीसस, मोहम्मद, कबीर, फरीद, मीराबाई, सहजोबाई, लल्लाबाई, लाओत्से, सुकरात, नामदेव, तुकाराम जैसे संतों ने पाया। लेकिन आज वह संपदा धूल खा रही है।
हर गली में मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद, चर्च मिल जाएगा, पर लोग उन ग्रंथों के ज्ञान को जीवन में नहीं उतार रहे। बाहर से पोथी पढ़ रहे हैं जैसे तोता पढ़ता है। असली संपदा हमारे पास है, बस उसे समझना है। अध्यात्म को जीवन में उतारना है। तभी भारत फिर से आंतरिक शांति के साथ विश्व के लिए मार्गदर्शक बन सकता है।
आने वाले कल में अध्यात्म की भूमिका
प्रश्न: आने वाले समय में अध्यात्म इंसान की कैसे मदद करेगा?
MAAsterG:
अध्यात्म है अपने आपको जानना। यह किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। अध्यात्म का मतलब है इस सवाल का जवाब पा लेना—मैं कौन हूँ— यानी इस शरीर-रूपी यंत्र को समझना। जब आप स्वयं को जान लेते हैं, तब आप AI की मौज लेने लगते हैं, उसके गुलाम नहीं बनते।
अगर AI में रियल इंटेलिजेंस नहीं डाला, तो यह सुपर न्यूक्लियर बम बन जाएगा। मशीन सब कुछ पी जाएगी, इंसान डिप्रेशन में चला जाएगा। इसलिए जो AI बना रहे हैं और लागू कर रहे हैं, उन्हें भी जिम्मेदारी समझनी होगी।
पहले रियल इंटेलिजेंस बुद्धिमत्ता को जानो। तुम रियल हो। अंदर की आत्मा और चेतना ही सत्य है, जो परम चेतना से जुड़ी है। वही भविष्य का संतुलन दे सकती है।


