सनातन का सत्यानाश: महंत ने होटल में मनाया बीबी का जन्मदिन

हरिद्वार। आजकल नेताओं को साधु बनने का शौक चढ़ा हुआ है। बिना साधु बने वह भगवा व संतों के वस्त्र धारण कर तपस्वी संत बने घूम रहे हैं। इतना ही नहीं महंत बनने के बाद बीबी का जन्मदिन होटल में धूमधाम से मना भी रहे हैं।


ऐसे ही संत बनकर घूमकर एक नेता को तो महामण्डलेश्वर तक बनाने का ऐलान कर दिया गया था। हालांकि बाद में संन्यास देने की बात कहकर अपना पीछा छुड़ाया गया। अब एक नए नेता भगवाधारण करने के बाद महंत बन गए हैं। वे अपनेे नाम के आगे महंत लिखने लगे हैं। बताया गया है कि एक प्राईवेट हनुमान मंदिर का उन्हें महंत बनाया गया है।


ठीक है, यदि कोई साधु जीवन जीना चाहता है तो इसमें कोई बुराई भी नहीं, किन्तु गृहस्थ जीवन का यापन करते हुए बिना विधिवत दीक्षा लिए महंत बनना कहां का धर्म है। यदि व्यक्ति गुसाईं है तो बात समझ में आती है। बावजूद इसके धर्म की मर्यादा के विपरीत आचरण करने के लिए उन्हें भी छूट नहीं हैं।


वैसे तो महंत जी आज अज्ञातवास में हैं और स्वंय को धर्म के मार्ग के लिए समर्पित बताते हैं। कुछ दिन पूर्व एक संत ने उनका सम्मान भी किया। मजेदार बात यह कि मोह माया से दूर होने की बात करने वाले महंत जी ने दो दिन पूर्व अपनी धर्मपत्नी का एक होटल में जन्मदिन मनाया। अब सोचिए एक मंदिर का महंत होटल में अपनी पत्नी का अपने चाहने वालों के साथ जन्मदिन मनाए तो इसे क्या कहा जाएगा। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि ऐसे लोग धर्म का सत्यानाश करने पर तुले हुए हैं। इतना ही नहीं जरा-जरा सी बात पर ज्ञान बांटने वाला संत समाज भी भगवा का उपहास उड़ाने वालों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने की बजाय चुप्पी साधे हुए है।

जिस प्रकार का आचरण नेता से साधु बनने की राह पर चलने वालों को या तो सनातन और संत परम्परा का ज्ञान नहीं है या फिर ऐसे लोग जानकर सनातन को पलीता लगाने का कार्य कर रहे हैं।

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