विरोध करने वाले संत को रास्ते से हटाने के लिए संत लेते हैं वेश्याओं का सहारा

उदासीन बड़ा अखाड़े के पदाधिकारियों पर लगाए महामण्डलेश्वर ने गंभीर आरोप


हरिद्वार।
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन को बचाने के लिए सभी भेष के संतों को आगे आकर मुकामी, मुखिया महंतों व श्री महंतों की मनमानी को रोककर अखाड़े व संत की परम्पराआंे को बचाना होगा। अखाड़े के कुछ पदाधिकारी संविधान से अपने को ऊपर मानने लगे हैं। जिस कारण से संत परम्परा का ह्ास हो रहा है। विरोध करने वालों के खिलाफ महिलाओं की आड़े लेकरउन्हें अपमानित करने का कार्य भी इनके द्वारा किया जाता है।


यह बात श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के म.म. स्वामी शिवानंद महाराज ने आज प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कही। स्वामी शिवानंद महाराज ने कहाकि अखाड़ा उदासीन सम्प्रदाय के सरंक्षण व संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करता आ रहा था, किन्तु कुछ वर्षों में धन लोलुप, लालचली व षडयंत्रकारी कालनेमियों ने अखाड़े में प्रवेश कर परम्पराओं का पतन करना शुरू कर दिया है। मुकामी महंत उदण्ड हो गए हैं। कुछ इस्तीफा देकर चले गए, किन्तु कुछ शेष हैं। मुखिया मंहत दुर्गादास फूट डालो और राज करो की नीति पर चल रहे हैं। इसके सैंकड़ों उदाहरण हैं।


कहाकि श्रीमहंत रघुमुनि महाराज ने अखाड़े के नियम विरूद्ध कार्य किया, जिस कारण से उन्हें हटा दिया गया, किन्तु इसके खिलाफ उन्होंने स्टे ले लिया। बावजूद इसके उनके स्थान पर नए महंत की नियुक्ति असंवैधानिक है। स्वामी शिवांनद महाराज ने कहाकि अखाड़े के संतों की प्राईवेट सम्पत्ति पर कब्जा करना भी इनकी फितरत हो गयी है। विगत 12 जुलाई को मुनि मण्डल आश्रम के म.म. स्वामी आनन्द राघव महाराज के उत्तराधिकारी की चादर विधि में महंत गंगादास, सुर्यांश मुनि, जयेन्द्र मुनि, चन्द्रमा दास समेत सात लोगों ने विवाद खड़ा किया। जिस कारण से सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। जयेन्द्र मुनि ने 53 करोड़ की संस्था की जमीन को बेच दिया, जिसके खिलाफ मुकदमा विचाराधीन है।


उन्होंने कहाकि गगा दास नेे शौकीदास आश्रम पर कब्जा कर लिया, जबकि उसके असली वारिश महंत त्रिवेणी दास महाराज हैं। इतना ही नहीं मुखिया महंत दुर्गादास ने एक व्यक्ति को बिना बहुमत के पॉवर आफॅ अटर्नी दे दी। कुछ लोग अखाड़े में गुण्डागर्दी पर उतारू हैं। दूसरे की सम्पत्तियों पर कब्जा करते हैं और विरोध करने पर उसे अखाड़े से वहिष्कृत कर दिया जाता है, जबकि अखाड़े से वहिष्कृत करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहाकि जो साधु अखाड़े के चार साधुओं को नहीं जोड़ पा रहे हैं वह समाज का क्या भला करेंगे। कोठारी महंत मोहन दास के लापता होने के पीछे भी अखाड़े के संतों की साजिश है।


स्वामी शिवानंद महाराज ने कहाकि अखाड़े के सम्पत्तियों को खुर्द-बुर्द करने के कारण कई राज्यों में मुकदमें चल रहे हैं। कहाकि आलम यह है कि यदि कोई संत इन कालनेमियों के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे बदनाम करने के लिए इन्होंने जो वैश्याएं रखी हुई हैं, उनके माध्यम से मुकदमें दर्ज करवाकर उसको अपमानित करने का कार्य करते हैं।
स्वामी दयानद मुनि महाराज ने भी अखाड़े के कुछ संतों पर गंभीर आरोप लगाते हुए इनकी जांच की मांग करने साथ सभी संतों से अखाड़े के परम्पराओं को बचाने के लिए आगे आने की अपील की।

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